नए चेहरे की वजह से भाजपा में विरोध थमने का नाम ही नही ले रहा

भोपाल: भारतीय जनता पार्टी ने अब तक 18 प्रत्याशी घोषित किए हैं, जिसमें ज्यादातर चेहरे पुराने हैं। इसकी तुलना में कांग्रेस ने ज्यादा संख्या में नए चेहरे चुनाव में उतारे हैं। चेहरों की लड़ाई में ही भाजपा बाकी बची हुई 11 सीटों के विवाद सुलझा नहीं पा रही है। टिकटों को लेकर भाजपा में आक्रोश भी कम नहीं हो पा रहा है। आदिवासी इलाकों में शहडोल में विद्रोह थम नहीं रहा है, मंडला में फग्गनसिंह कुलस्ते को लेकर जनता में नाराजगी है। वहीं, कांग्रेस ने डॉ. गोविंद मुजालदा, प्रहलाद टिपानिया, शैलेंद्र दीवान जैसे नए चेहरे उतारे हैं|

सात टिकट काटे, छह नए चेहरे

भाजपा में अब तक 18 घोषित टिकटों में से छह नए चेहरे हैं। भिंड से डॉ. भागीरथ प्रसाद का टिकट काटकर भाजपा ने अनुसूचित जाति वर्ग की संध्या राय को टिकट दी है। राय 2003 में भाजपा से पहली बार विधायक चुनी गई थीं। परिसीमन के चलते उन्हें आगे चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिला। शहडोल में भी भाजपा की दृष्टि से हिमाद्री सिंह को नया चेहरा माना जा सकता है। अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित इस सीट पर भाजपा के पास विकल्प नहीं थे। पहले यहां से 1977 से जनता पार्टी के जमाने से लेकर 2014 तक लोकसभा चुनाव में भाजपा दलपत सिंह परस्ते को ही अधिकांश चुनाव में प्रत्याशी बनाया करती थी।

कांग्रेस से शहडोल से कद्दावर आदिवासी नेता दलबीर सिंह और उनकी पत्नी राजेश नंदिनी ने भी कई चुनाव जीते। हिमाद्री उन्हीं की बेटी हैं। उपचुनाव 2016 में वे कांग्रेस की प्रत्याशी थीं। जिनके खिलाफ ज्ञानसिंह ने उपचुनाव जीता पर मात्र दो साल में ही ज्ञानसिंह की लोकप्रियता का ग्राफ नीचे गिरा इसलिए पार्टी ने हिमाद्री पर दांव लगाया। बैतूल में भाजपा ने दुर्गादास उईके को प्रत्याशी बनाया है। पार्टी ने इस सीट पर जरूर फ्रेश चेहरा दिया है। यहां से पार्टी ने ज्योति धुर्वे का टिकट काटा है।

अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित उज्जैन से चिंतामणि मालवीय का टिकट काटकर भाजपा ने अनिल फिरोजिया को टिकट दिया है। हालांकि फिरोजिया कुछ ही महीने पहले विधानसभा चुनाव हारे थे। पर मालवीय के बयानों से उज्जैन का सामान्य और ओबीसी वोटर नाराज था। खरगोन सीट भी आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित है। इस पर सुभाष पटेल का टिकट काटकर गजेंद्र पटेल का उतारा गया है। पटेल 2013 में विधानसभा चुनाव हार गए थे। बालाघाट से सांसद बोधसिंह भगत और पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन की लड़ाई में भाजपा ने डॉ. ढालसिंह बिसेन पर दांव लगाया है। बिसेन बालाघाट के लिए नए हैं। वे मूल रूप से सिवनी जिले के हैं।

कांग्रेस ने दिए नौ नए चेहरे

कांग्रेस ने अब तक 22 टिकट घोषित किए हैं, जिनमें नौ नए चेहरे हैं। खरगोन से डॉ. गोविंद मुजालदा को टिकट दिया है। मुजालदा जनरल प्रेक्टीशनर हैं। उनकी सामाजिक छवि के चलते ही गृहमंत्री बाला बच्चन की पत्नी प्रवीणा का नाम काटा गया। देवास से कांग्रेस ने भजन गायक प्रहलाद टिपानिया को मैदान में उतारा है। वे कबीर के दोहे को भजन के रूप में गाते हैं। 2011 में उन्हें पद्मश्री अवार्ड भी मिल चुका है।

होशंगाबाद से भी कांग्रेस ने शैलेंद्र दीवान को खड़ा किया है। वे पूर्व गृहराज्य मंत्री दीवान चंद्रभान सिंह के बेटे हैं। छिंदवाड़ा से उतारे गए नकुलनाथ मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे हैं। रीवा से सिद्धार्थ तिवारी को उतारा है, वे पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. श्रीनिवास तिवारी के पोते हैं। सतना से राजाराम त्रिपाठी को भी लोकसभा चुनाव का टिकट पहली बार मिला है। टीकमगढ़ से किरण अहिरवार को प्रत्याशी बनाया है। वे पूर्व आईएएस आरएन बैरवा की बेटी हैं। उनका ससुराल पक्ष राजनीति में सक्रिय है।

शहडोल से प्रमिला सिंह को कांग्रेस ने प्रत्याशी बनाया है। वे पिछले चुनाव में भाजपा से विधायक रही हैं। बैतूल से पार्टी ने एनएसयूआई और युवा कांग्रेस में काम कर चुके रामू टेकाम को प्रत्याशी बनाया है।

जनता की आकांक्षाओं के अनुसार दिए प्रत्याशी

भाजपा अनुभव और ताजगी के बीच संतुलन रखते हुए जनता की आकांक्षाओं के अनुसार प्रत्याशी दे रही है। आने वाले 11 प्रत्याशी भी जनभावना के अनुसार ही होंगे।

-रजनीश अग्रवाल, प्रवक्ता, मध्य प्रदेश भाजपा

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