कराची में विमान क्रैश होने से पहले पायलट ने तीन बार कहा था मेडे-मेडे-मेडे, जानिए क्या होता है इसका मतलब

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जिंदगी से सभी को प्यार होता है और तब ये और भी अधिक बढ़ जाता है जब किसी को ये दिखने लगता है कि अब मौत उसके सामने खड़ी है। इससे पहले वो अपने जीवन को बचाने की हर संभव कोशिश करता है और मदद भी मांगता है मगर जीवन और मृत्यु ऊपर वाले के हाथ में होती है, इससे कोई इनकार भी नहीं कर सकता है।

शुक्रवार को पाकिस्तान में जो विमान हादसा हुआ उसके पायलट ने भी अपने और विमान में सवार यात्रियों के जीवन को बचाने के लिए हरसंभव कोशिश की, कंट्रोल रूम को मेडे-मेडे-मेड कहकर अंतिम बार संदेश भी दिया मगर वो न तो विमान को बचा पाया न ही अपनी जिंदगी।

जिसका नतीजा ये हुआ है कि पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस का एक विमान लैंडिंग से ठीक एक मिनट पहले कराची में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस विमान में कुल 99 लोग सवार थे। विमान एयरपोर्ट के नजदीक घनी आबादी पर गिरा है। इस हादसे में 97 से अधिक की मौत हो गई। बता दें कि लॉकडाउन के बाद पाकिस्तान एयरलाइंस की यह पहली उड़ान थी। सुनिए पायलट और कंट्रोल रूम के बीच अंतिम बातचीत।

क्या होता है मेडे का मतलब, कहां से आया है ये शब्द 

रेडियो संपर्क के दौरान डिस्ट्रेस कॉल यानी मुसीबत में होने की जानकारी देने के लिए विमान चला रहा पायलट कंट्रोल रूम को ‘Mayday’ का संदेश देता है। इस शब्द का इस्तेमाल ऐसी परिस्थिति में किया जाता है जब जान को खतरा बन आया हो। विमानन क्षेत्र में मेडे शब्द का इस्तेमाल बेहद खराब परिस्थितियों के लिए किया जाता है।

इससे साफ पता चलता है कि विमान के इंजन खराब हो गए थे और तकनीकी परेशानी के चलते स्थिति पायलट के हाथ से बाहर निकल गई थी। अपनी जान को खतरा होने की स्थिति में रेडियो के जरिए तीन बार Mayday बोलकर कंट्रोल रूम को सूचना दी जाती है कि स्थिति खराब है। दरअसल, यह फ्रेंच शब्द m’aider से निकला है जिसका मतलब है ‘मेरी मदद करो।’

कराची के Jinnah International Airport(जिन्ना इंटरनेशनल एयरपोर्ट) पर लैंडिंग से कुछ वक्त पहले ही क्रश हुए लाहौर से आए प्लेन के पायलट सज्जाद गुल (Sajjad Gul) की कंट्रोल रूम से बातचीत का एक ऑडियो भी अब सामने आ गया है। इसमें वह बता रहे हैं कि प्लेन के इंजन खराब हो चुके हैं और वह ‘Mayday’का सिग्नल कंट्रोल रूम को भेजते हैं।

विमान के पायलट सज्जाद गुल की आखिरी डिस्ट्रेस कॉल सामने आई है जिसे सुनकर पता चलता है कि क्रैश से कुछ सेकंड पहले क्या हुआ था। पायलट ने टूटे हुए सिग्नल के बीच कंट्रोल रूम को इंजन खराब होने की जानकारी दी, उसके बाद कुछ ही पलों में विमान आबादी वाले हिस्से में गिरकर क्रैश हो गया। ये भी सुनने में आया कि कंट्रोल रूम पायलट को बेली लैंडिंग के लिए दोनों रनवे उपलब्ध होने के लिए कहते हैं मगर जब तक पायलट ऐसा कर पाता तब तक हादसा हो गया।

क्या होती है बेली-लैंडिंग? 

प्लेन के लैंड होने के लिए उसके निचले हिस्से में लैंडिंग गियर लगे होते हैं। पायलट को जब रनवे पर विमान उतारना होता है तो वो लैंडिंग गियर को खोलते हैं, उनके खुलने के साथ ही प्लेन उनके सहारे रनवे पर लैंड करता है। हालांकि, गियर के न खुलने की स्थिति में प्लेन के निचले हिस्से के सहारे ही लैंडिंग की कोशिश की जाती है ताकि वह एकदम से जमीन पर क्रैश होकर न गिर जाए।

इसे बेली लैंडिंग कहते हैं। यदि विमान पूंछ के बल लैंड करता है तो विमान के अगले हिस्से को कम नुकसान पहुंचता है यदि विमान अगले हिस्से के बल लैंड करता है तो अधिक नुकसान होता है। यदि बीच के बल लैंड करता है तो वो टूटकर अलग हो जाता है। साथ ही आग लगने का भी खतरा अधिक होता है। कराची में जो विमान हादसा हुआ उसमें भी ये सामने आया है कि कि विमान के लैंडिंग गियर खुल नहीं सके और यह मकानों पर जा गिरा।

 

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