FREEDOM OF EXPRESSION के साथ राजनीती के शिकार हो रहें आज के पत्रकार

विकास गोस्वामी: आज कल पत्रकारिता की जब भी बात होती है, तो तुरंत पत्रकारों को दलाल पत्रकार, गोदी मीडिया, चमचे पत्रकार और इसी प्रकार के न जाने कितने तमगे बिलकुल मुफ्त में मिल जाते हैं| आज मैं इस बात को आप लोगो के सामने इस लिए भी लेकर आया क्युकि 2019 का आम चुनाव सर पर है | और इस बात पर संदेह करना बेईमानी होगी की चुनावों में मीडिया का रोल बहुत खास नही होता है|

सबसे पहले मीडिया को दो भागो में बाटा जाये पहला वे पत्रकार जो समाज के लिए अच्छे हैं देश के लिए सोचते हैं| और दुसरे वो जो नेताओ के इसारे पर ख़बरें लिखतें हैं और दिखाते हैं|

अब जैसे मीडिया को दो भागो में बाटा ठीक वैसे ही sartificate देनें वालों को भी दो भागों में बाटते हैं | पहले वो जो सत्ता के समर्थन में हैं और दुसरे वो जो विपक्ष के समर्थन में रहते हैं| इन समर्थकों द्वारा पत्रकारिता की परिभाषा गढ़ ली जाती है, और फिर अपने सुविधानुसार उस परिभाषा में विभिन्न पत्रकारों को for the example के रूप में लगे हाथ ले लिया जाता है|

ऐसे में सवाल ये उठता है की सही पत्रकारिता की परिभाषा क्या होनी चाहिए?

वैसे कुछ बुद्धिजीवियों का ये मनना है की पत्रकारिता हमेसा सत्ता के विपरीत होनी चाहिए| और कुछ लोगों का ये भी मानन है की सत्ता के अच्छे कामों पर भी जनता का ध्यान दिलाना आवश्यक है|

चुकी लोकतंत्र है और लोक तंत्र में  freedom of expresion इन दिनों काफी चर्चा में है तो क्यों न मैं भी इसका लाभ उठाते हुए पत्रकारिता पर अपनी राय कायम कर ही लूं| बाद में अगर किसी ने सवाल खड़ा किये तो freedom of expression तो बचाने के लिए है ही| वैसे freedom of expresion इस देश में इतना है की लोग प्रधानमंत्री तक को गाली देने से नही चुकते | वो भी सही , लेकिन कई बार तो ऐसा हो जाता है की उनकी माँ और पत्नी को घेरते हुए उनकी निजी जिन्दगी की ऐसी तैसी करने के बाद भी freedom of expression का सहारा ले लिया जाता है |

वापस पत्रकारिता की परिभाषा पर आते हैं, मेरे हिसाब से पत्रकारिता किसी के पक्ष में हो या विपक्ष में, लेकिन पत्रकारिता हमेसा समाज के और देश के हित में होनी चाहिए| पत्रकरीता सबसे पहले देश हित में हो और फिर समाज के हित में| फिर चाहे इसके लिए कोई किसी भी प्रकार के शब्दों का संबोधन दे|

अंत में उन पत्रकारों को एक सलाह जिन्हें लगता है वो देश भक्त पत्रकार हैं इन तमाम इल्जामों को ख़ारिज करते हुए सिर्फ एक बात यद् रखें -‘ कुछ तो लोग कहेंगे लोगो का कम है कहना ‘

विकास गोस्वामी  (न्यूज़ एडिटर & एंकर)

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