भाभियों ने देवरों के फाड़े कपड़े, भक्तों ने खेली ‘कपड़ा फाड़’ होली (Holi), प्रसाद में बंटे भांग

मथुरा (Mathura) जिले के बलदेव क्षेत्र में दाऊजी मंदिर के परिसर में भक्तों ने 'कपडा फाड़' होली खेली है।

मथुरा: श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा (Mathura) में होली (Holi) का त्यौहार राधा और कृष्ण के प्रेम उत्सव के रूप में मनाया जाता है। मथुरा जिले के बलदेव क्षेत्र में दाऊजी मंदिर के परिसर में भक्तों ने हजारों साल पुरानी परंपरा हुरंगा ‘कपडा फाड़’ होली खेली है। जिसके कारण पूरा मंदिर परिसर रंगीन हो गया। हजारों साल पुरानी परंपरा हुरंगा (Huranga) ‘कपडा फाड़’ होली में स्थानीय महिलाएं जिसे (हुरियारिन) कहते हैं उन्होंने अपने देवरों (हुरियारे) के कपड़े फाड़ कर उन पर कोड़े बरसाए। इस उत्सव में सभी भक्तों ने राधे-कृष्ण और बलदाऊ के नारे जमकर लगाए।

‘कपडा फाड़’ होली

‘कपडा फाड़’ होली के लिए 28 क्विंटल टेसू के फूल, अबीर-गुलाल, भुडभुड, गेदें और गुलाब के फूलों से मंदिर परिसर को अच्छी तरह से भर दिया गया था। जिससे कि इस आयोजन को भव्य बनाया जा सके। इसके साथ ही बलदाऊ को ताम्र पत्र लगी भांग का भोग लगाया गया और भक्तों को प्रसाद के रूप में बांटा गया भांग।

विश्व प्रसिद्ध हुरंगा

दाऊजी मंदिर का हुरंगा ‘कपडा फाड़’ होली पुरे विश्व में प्रसिद्ध है जो होली के एक दिन बाद मनाया जाता है जिसको देखने के लिए देश-विदेश से भक्तजन आते है इस हुरंगे में पांडेय समाज के लोग ही सम्मिलित होते है जो इस मंदिर के पुजारी भी है हुरंगे के लिए खासतौर पर गुलाल बनाया जाता है और टेशू के फूल मंगाए जाते है कई दिनों पहले से ही हुरंगे की तैयारी मंदिर परिसर में शुरू हो जाती है हुरंगे के दिन सुबह 5 बजे मंदिर खुल जाता है सुबह से ही भक्तो की भीड़ बढ़ती जाती है और दर्शन करने के बाद सभी भक्त हुरंगा देखने के लिए मंदिर की छत पर बैठते जाते है।

मथुरा में भाभियों ने देवरों संग खेली कपड़ा फाड़ होली

हुरंगा दोपहर में 12 बजे शुरू होता है हुरंगे में भाभी अपने देवर के कपड़ो को फाड़ती है और उसी कपड़े को पानी में भिगोकर प्यार से अपने देवर के शरीर पर मारती है। इस मार को खाने और सहन करने के लिये सभी पुरुष सुबह से ही भांग पीते है और ब्रज की वेशभूषा में सज धज कर आते है।

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