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चीनी हैकर्स को धूल चटाएगी Bharat-अमेरिका की जोड़ी

नई दिल्ली : खबर है की चीन के साइबर हमलों से Bharat के डिफेन्स सेक्टर के इंफ्रास्ट्रक्चर को और महफूज़ करने के ख़ातिर देश ने अमेरिका के साथ-साथ अन्य देशों से भी मदद लेने की योजना बनाई है।

असल में पूरा मामला यह है कि डिफेंस चीफ़ जनरल बिपिन रावत ने बुधवार को नई दिल्ली में हुए एक सेमिनार में कहा कि भारत अपनी क्षमताओं को विकसित करने के लिए पहले से तेज़ दौड़ रहा है, लेकिन इतना डेवलप्ड होने के बावजूद भी इसके अहम सिविल और मिलिट्री सिस्टम पर अभी भी साइबर ब्रीच का खतरा मंडरा रहा है। इसी कड़ी में  पिछले महीने रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन की यात्रा के दौरान इस मामले पर चर्चा की गई थी और साइबर स्पेस और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में सहयोग लेने का निर्णय लिया गया था।

रावत ने दिए अपने बयान में कहा कि देश की सुरक्षा के खातिर हमें अपने कॉम्पिटीटर चीन के टेक्नोलॉजिकल डेवलपमेंट पर गंभीरता से ध्यान देना होगा। क्यूंकि हम चीन के मुकाबले इस सेक्टर में पूरी तरह से पकड़ बनाने में सक्षम नहीं हो सकते हैं, इसलिए हम डेवलप्ड वेस्टर्न देशों के साथ संबंध विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि अपनी इन कमियों को दूर कर किसी बड़े हादसे के होने से पहले खुद को मेहफ़ूज़ कर सकें। चीन-भारत स्टैंड ऑफ के दौरान में मुंबई में हुआ पावर आउटेज हो या नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में आया ग्लिच जानकारों की माने तो यह देश को नुकसान पहुंचने की मंशा से किया गया साइबर ब्रीच भी हो सकता है। इसी के बाद से अपनी साइबर सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए भारत अब एक नई राष्ट्रीय रणनीति तैयार कर रहा है। जिसमे वेस्टर्न देश भारत की मदद करेंगे।

मुंबई पावर आउटेज से Bharat को हुआ था नुकसान

साइबर हमलों से हम कितने असुरक्षित हैं इस बात की गवाह है यू.एस बेस्ड सिक्योरिटी फर्म रिकॉर्डेड फ्यूचर की वह चेतावनी जिसमे बताया गया था की चीन के हैकर्स भारत के 10 पावर ग्रिड और दो समुद्री बंदरगाहों को निशाना बना सकते हैं। इसी चेतावनी के कुछ वक़्त बाद मुंबई पावर आउटेज देखा गया  जिसने देश की फिनांशल कैपिटल को ठप कर दिया था। जिसका असर शहर के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के साथ साथ शेयर बाजार पर भी पड़ा था।

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