जयंती विशेष: भारतरत्न पं. गोविन्द बल्लभ पन्त की कलम बनी थी अंग्रेजों को उखाड़ फेंकने का हथियार

नई दिल्ली: प्रसिद्ध स्वतन्त्रता सेनानी और वरिष्ठ भारतीय राजनेता भारतरत्न पंडित गोविन्द बल्लभ पन्त का आज जन्मदिन है। वे उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री और भारत के चौथे गृहमंत्री थे। उनमें सार्वजनिक रूप से अपने विचार तर्क, साहस, आत्मविश्वास तथा सच्चाई के साथ बात रखने की प्रबल क्षमता थी। एक वकील के रूप में वह सिर्फ सच्चे केस लेते थे। वह झूठ पर आधारित मुकदमे स्वीकार नहीं करते थे।

उन्होंने काकोरी कांड, मेरठ षड्यंत्र के क्रांतिकारियों के अलावा प्रताप समाचार पत्र के सम्पादक श्री गणेश शंकर विद्यार्थी के उत्पीड़न के विरोध में अदालतों में प्रभावशाली ढंग से पैरवी की थी। उन्होंने ”शक्ति” नाम से एक साप्ताहिक समाचार पत्र निकाला जिसमें वह कुमायूँ की समस्याओं को उजागर करते थे। उन्होंने अपनी कलम को भी अंग्रेजी शासन को उखाड़ फेंकने के लिए एक सशक्त हथियार बनाया।

पंत जी का जन्म 10 सितम्बर 1857 में गांव खूंट, अल्मोड़ा उत्तराखंड (पहले उत्तर प्रदेश) में हुआ था। मां का नाम श्रीमती गोविंदी बाई था। माता के नाम से ही उनको गोविन्द नाम मिला था। उनके पिताजी श्री मनोरथ पंत जी सरकारी नौकरी में रेवेन्यू कलक्टर थे।

भारत रत्न पं. गोविन्द बल्लभ पंत आधुनिक उत्तर भारत के निर्माता के रूप में आज याद किये जाते हैं। वह देश भर में सबसे अधिक हिन्दी प्रेमी के रूप में जाने जाते थे। उन्होंने 4 मार्च, 1925 को जनभाषा के रूप में हिन्दी को शिक्षा और कामकाज का माध्यम बनाने की जोरदार मांग उठाई थी। पंत जी के प्रयासों से हिन्दी को राजकीय भाषा का दर्जा मिला। पंत जी ने हिन्दी के प्रति अपने अत्यधिक प्रेम को इन शब्दों में प्रकट किया है− हिन्दी के प्रचार और विकास को कोई रोक नहीं सकता। हिन्दी भाषा नहीं भावों की अभिव्यक्ति है।

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