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नई दिल्ली। विपक्ष की बढ़ती एकता को देखते हुए सत्तारूढ़ भाजपा भी अपने नाराज सहयोगियों को थामने की कोशिश में है। इसी कड़ी में भाजपा अध्यक्ष ने शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे से मुलाक़ात की। इस मुलाक़ात का उद्देश्य अपनी शक्ति को बढ़ाना और विपक्षियों को आने वाले चुनावों में शिकस्त देने के लिए खुद को मजबूत करना है। वैसे तो शिवसेना के प्रवक्ता पहले से ही अकेले चुनाव लड़ने की बात करते रहे हैं। वहीं शाह और उद्धव की मुलाक़ात से पहले भी इस बात का इलान किया गया था कि शिवसेना आने वाले चुनावों में अकेले ही कदम आगे बढ़ाएगी। पर बंद कमरे में हुई मुलाक़ात से कुछ और ही आसार बनते-बिगड़ते दिखाई दे रहे हैं।

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सत्तारूढ़ भाजपा

 

खबरों के मुताबिक़ शाह और उद्धव की मुलाक़ात के बाद एक बार फिर दोनों दलों के बीच गठबंधन की चर्चा जोर पकड़ रही है। जानकारों के मुताबिक बताया जा रहा है कि शिवसेना और भाजपा एक साथ चुनावी कदम बढ़ा सकती है। लेकिन उद्धव ने इसके लिए शाह के सामने कुछ ख़ास शर्तों को पेश किया है।

शिवसेना ने बीजेपी के सामने शर्त रखी है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में 2014 का ही फार्मूला जारी रखेंगे।

हालांकि, विधान सभा चुनाव में सेना ने 288 सीटों में से कुल 152 सीटें मांगी हैं और बाकी बची 136 सीटें बीजेपी को देने की बात कही है। इसके अलावा शिवसेना ने यह भी शर्त रखी है कि पीएम तुम्हारा होगा पर सीएम हमारा होगा।

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इधर, बीजेपी सूत्रों का कहना है कि पार्टी 130 से ज्यादा असेंबली सीटें शिवसेना को नहीं दे सकती है। अमित शाह ने भी महाराष्ट्र में पार्टी पदाधिकारियों, सांसदों और विधायकों से अकेले चुनाव लड़ने की स्थिति में रणनीति बनाने को कहा है।

वहीं शिवसेना के एक नेता ने एक समाचार पत्र से बातचीत में बताया कि पार्टी लोकसभा और विधान सभा दोनों पर एकसाथ समझौता करना चाहती है, क्योंकि अगर केंद्र में शिवसेना के समर्थन से एक बार बीजेपी की सरकार बन गई तो शिवसेना विधान सभा चुनाव में अकेले लड़कर भी सत्ता हासिल नहीं कर पाएगी। दरअसल, शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे राज्य में अब अपनी पार्टी का सीएम चेहरा देखना चाहते हैं।

सूत्र बता रहे हैं कि मातोश्री में जब अमित शाह और उद्धव ठाकरे बंद कमरे में मुलाकात कर रहे थे तब शिवसेना ने शाह के सामने 152 सीटों का प्रस्ताव रखा था, तब शाह ने उद्धव को भरोसा दिलाया कि वो जल्द ही इस फार्मूले पर चर्चा करेंगे।

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वहीं साल 2014 पर ध्यान दें तो उस वक्त विधानसभा चुनाव शिवसेना और बीजेपी ने अलग-अलग लड़ा था। हालांकि, बाद में दोनों दलों ने मिलकर सरकार बनाई।

2014 में लोकसभा चुनाव दोनों दलों ने साथ मिलकर लड़ा था। राज्य की 48 संसदीय सीटों में से बीजेपी ने 26 पर चुनाव लड़ा था जबकि शिवसेना ने 22 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे। चुनावों में बीजेपी ने 23 और शिवसेना ने 18 सीटों पर जीत दर्ज की थी।

दूसरी ओर शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत कहते रहे हैं कि उनकी पार्टी अकेले लड़ेगी। बीजेपी अध्यक्ष की मुलाकात को भी राउत ने राजनीतिक ड्रामा करार दिया था।

फिलहाल अभी दोनों ही दलों ने साफ़ तौर पर कुछ भी जाहिर नहीं किया, इसलिए मामला अभी भी संशय में अटका हुआ है। यदि शाह उद्धव की शर्ते मानने को तैयार हो जाते हैं तो यकीनन भाजपा के प्रभाव में और मजबूती देखी जानी लाजमी है।

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