बड़ी खबर: मूलभूत सुविधाओं से वंचित गाँव के 500 परिवारों ने किया मतदान का बहिष्कार

पोहरी विधानसभा में वोटर्स ने उपचुनाव में मतदान का बहिष्कार कर दिया है. ऐसा एक, दो, दस लोगों ने नहीं गाँव के पूरे 500 परिवारों ने किया है.

शिवपुरी: देश में अपने हक के लिए लोगों की जागरूकता और हक की लडाई का उधाहरण मध्य प्रदेश से सामने आया है. यहाँ शिवपुरी जिले की पोहरी विधानसभा में वोटर्स ने उपचुनाव में मतदान का बहिष्कार कर दिया है. ऐसा एक, दो, दस लोगों ने नहीं गाँव के पूरे 500 परिवारों ने किया है. ये बहिष्कार ग्राम बूड़दा के लोगों ने किया है. मंगलवार को हो रहे मतदान में वोट न डालने के बाद प्रशासनिक अधिकारी गाँव के लोगों को वोट डालने के लिए मनाते रहे, लेकिन वे नहीं मानें.

आखिर क्यों किया गाँव वालों ने मतदान का बहिष्कार ?

बता दें की जन समस्याओं ने घिरे ग्राम बूड़दा के लोगों ने मुआवजे को लेकर ये फैसला लिया है. अपर ककेटो डैम के डूब क्षेत्र में आने वाले 556 परिवारों में से सरकारी मुआवजा मात्र 56 लोगों को मिला था. जबकि 500 परिवार मुआवजा न मिलने से गंभीर समस्याओं के बीच गुजर बसर करने को मजबूर हैं. जबकि गाँव वासियों का कहना है डूब क्षेत्र का हवाला देकर प्रशासनिक अधिकारी यहाँ का विकास न तो कर रहे न हमे विस्थापित कर रहे. जिसके चलते हम नरक भोगने को विवश हैं.

ग्रामीणों का कहना है, पिछले विधानसभा चुनावों में जब नेता वोट मांगने आए थे तो हमने उन्हें अपनी समस्यायों से अवगत कराया था। जिसके बाद उन्होंने आश्वासन भी दिया, लेकिन आज तलक कुछ नहीं हुआ, इसलिए हम 500 परिवार एक मत होकर सभी राजनितिक दलों को सबक सिखा रहे और मतदान न करके उन्हें दुरुस्त करेंगे.

65 किलोमीटर की दूरी पर बसा बूड़दा गाँव आज भी सुविधाओं से वंचित

आपको बता दें कि जिला मुख्यालय से 65 किलोमीटर की दूरी पर बसा बूड़दा गाँव आज भी सड़क और सरकारी योजनों के लाभ पहुचने का इंतज़ार नज़र गड़ा कर कर रहा है. पूरे ग्राम की सड़कें गड्डा युक्त हैं. बगल में डैम होने से उसका पानी भरा रहता है और तमाम तरह के सांप-कीड़ों की भी भरमार है.

ग्रामीणों का कहना है, हमे दूसरी जगह विस्थापित करवाया जायेगा ये बात पिछले चुनावों में वोट मांगने आये नेताओं ने कही थी. लेकिन 556 परिवारों में से महज 56 परिवारों को मुआवजा देेने के बाद उन्हें बूड़दा तिराहे के पास चरनोई की जमीन पर प्लॉट दे दिए गए, जबकि पांच सौ परिवारों को अपने हाल पर छोड़ दिया गया, इसलिए हम ग्रामवासियों में नेताओं और राजनितिक दलों को लेकर रोष है।

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