बंगाल सरकार को बड़ा झटका, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की ये याचिका

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय पुलिस सेवा ( IPS ) अधिकारियों को अपने पास प्रतिनियुक्ति पर बुलाने के केंद्र सरकार के अधिकार को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने पश्चिम बंगाल के वकील अबु सोहेल की याचिका खारिज कर दी है। IPS के ट्रांसफर से जुड़े नियम के मुताबिक राज्य सरकार की मर्जी न होने पर भी किसी अधिकारी को केंद्र अपने पास डेप्यूटेशन पर बुला सकता है। इस नियम को गलत ठहराते हुए पश्चिम बंगाल के वकील अबु सोहेल ने कोर्ट में याचिका दी थी।

केंद्र और राज्य में हुई थी तनातनी

पिछले साल दिसंबर माह में BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा के कार्यक्रम पर हुए हमले के बाद केंद्र ने पश्चिम बंगाल कैडर के तीन IPS अफसरों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर बुला लिया था। जिसके बाद बंगाल सरकार और केंद्र के बीच तनातनी हो गई थी। इसके बाद इन नियमों को गलत ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। लेकिन कोर्ट ने इसको केंद्र के पक्ष में करते हुए याचिका को खारिज कगर दिया। याचिकाकर्ता ने भारतीय पुलिस सेवा (कैडर) नियमावली, 1954 के नियम 6(1) की संवैधानिकता को चुनौती दी थी, जिसके तहत IPS अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर अपने पास बुलाने का केंद्र को अधिकार है।

केंद्र के पास है अधिकार

केंद्र सरकार के पास किसी IPS अधिकारी को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर अपने पास बुलाने का पूरा अधिकार है। क्योंकि इनकी नियुक्ति केंद्र सरकार करती है और IPS अधिकारियों के कैडर का आवंटन केंद्रीय गृह मंत्रालय ही करता है। हालांकि ऐसा एक निश्चित समय तक के लिए किया जा सकता है। बाद में वह अधिकारी अपने मूल कैडर में लौट जाता है।

वहीं इंडियन पुलिस सर्विस (कैडर) रूल्स, 1954 के नियम 6 के मुताबिक केंद्र सरकार, राज्य की सहमति से किसी IPS अधिकारी को प्रतिनियुक्ति पर बुला सकती है। लेकिन इस नियम में यह भी बताया गया है कि अगर राज्य सरकार केंद्र से सहमत न हो तब भी अंतिम फैसला केंद्र का ही होगा। जिसे राज्य को मानना होगा।

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