जन्मदिन विशेष: मदर टेरेसा का जीवन और उनकी अकेलेपन पर कही गई पांच बातें जो आप को जरूर जाननी चाहिये

आज मदर टेरेसा (Mother Teresa) को उनके 110 वे जन्मदिन (Birth Anniversary) पर पूरी दुनिया याद कर रही है। शांति का नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) पाने वाली मदर टेरेसा ने अपना पूरा जीवन गरीबों की सेवा में लगा दिया था। मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त 1910 को अल्बानिया में हुआ था। 18 साल तक अल्बानिया में रही।फिर वे पहले आयरलैंड गईं और 1929 में भारत आकर लोगों की सेवा में लग गईं।उन्होंने मुख्यतः कुष्ठ (कोढ़) रोगियों की सेवा की जिन्हे समाज में हे दृष्टि से देखा जाता था। उन्होंने अपने निस्वार्थ सेवा से पूरी दुनिया के सामने मिसाल पेश की थी। आज मदर टेरेसा के इन परोपकारी कामों की वजह से पूरी दुनिया में उनका सम्मान होता है। खास कर भारतीयों के दिलों में उनके लिए एक खास जगह है।

मदर टेरेसा ने अपना पूरा जीवन समाज में अलग थलग किये गए अकेले पड़ चुके दुखी और गरीबों की सेवा की। ऐसे में उनके द्वारा अकेलेपन पर लिखी गई ये पांच बातें हम सब को जरूर जान लेनी चाहिए।

अकेलापन सबसे भयानक गरीबी है

अकेलापन और अवांछित रहने की भावना सबसे भयानक गरीबी है

आज के समाज की सबसे बड़ी बीमारी कुष्ठ रोग या तपेदिक नहीं है, बल्कि अवांछित रहने की भावना है

अगर हमारे मन को शांति नहीं है तो इसकी कारण है कि हम यह भूल गये है कि हम एक दुसरे के हैं 

जिस व्यक्ति को कोई चाहने वाला न हो, कोई ख्याल रखने वाला न हो, जिसे हर कोई भूल चुका हो,मेरे विचार से वह किसी ऐसे व्यक्ति की तुलना में जिसके पास कुछ खाने को न हो,कहीं बड़ी भूख, कही बड़ी गरीबी से ग्रस्त है।

 

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