नोट से भी ज्यादा खतरनाक है बिटकॉइन, जानिये क्यों?

नई दिल्ली: इन दिनों बिटकॉइन ( Bitcoin ) सुर्खियों में चल रहा है और यह सुर्खियों में अपनी कीमत की वजह से है। जी हां इस बिटकॉइन की कीमत इस समय रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। एक बिटकॉइन की कीमत इस वक्त भारतीय मुद्रा में लगभग 32 लाख से ज्यादा है। यही वजह है कि निवेशक इन दिनों बिटकॉइन ( Bitcoin ) में खूब निवेश कर रहे हैं। वहीं अगर देश में बिटकॉइन आ जाता है तो इससे पर्यावरण ( Environment ) पर काफी असर देखा जा सकता है। तो आइये उदाहरण से जानते हैं कि बिटकॉइन और नोट कैसे बनती हैं और इससे क्या फर्क पड़ने वाला है।

क्या होता है बिटकॉइन?

बिटकॉइन दुनिया में बढ़ती एक ऐसी मुद्रा है जिसे ना हम छू सकते है और ना ही देख सकते है। आम तौर पर डेबिट/क्रेडिट कार्ड से भुगतान करने में लगभग दो से तीन प्रतिशत लेनदेन शुल्क लगता है, लेकिन बिटकॉइन में ऐसा कुछ नहीं होता है। इसके लेनदेन में कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगता है, इस वजह से भी यह लोकप्रिय होता जा रहा है।

मौजूदा समय में दुनिया भर की बड़ी कम्पनिया इसमें अपना विशवास दिखा रही है क्योंकि यह सबसे ज़्यादा सुरक्षित और तेज मानी जाने वाली मुद्रा है। इस वक़्त दुनिया में 1 करोड़ से अधिक बिटकॉइन हैं। भारत में इस वक़्त एक बिटकॉइन की कीमत 32 लाख से ज्यादा है। अगर किसी के पास बिटकॉइन है तो वह आम मुद्रा की तरह ही सामान खरीद सकता है। हालांकि भारत में सुप्रीम कोर्ट ने इसे अवैध करार दिया है। लेकिन फिर भी लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

कैसे बनती है नोट?

भारतीय रिजर्व बैंक ( RBI ) द्वारा नोट तैयार करने के लिए कॉटन से बने कागज और अलग तरह की स्याही का इस्तेमाल किया जाता है। बता दें कि भारतीय करेंसी नोट तैयार करने के लिए जिस कागज का इस्तेमाल किया जाता है, उसमें कुछ का प्रोडक्शन महाराष्ट्र स्थित करेंसी नोट प्रेस ( CNP ) और अधिकांश का प्रोडक्शन मध्य प्रदेश के होशंगाबाद पेपर मिल में ही होता है। वहीं रिजर्व बैंक के अनुसार, हर साल देश में 2 हजार करोड़ करेंसी नोट छापता है। इसकी 40 प्रतिशत लागत कागज और स्याही के आयात में जाती है। ये कागज जर्मनी, जापान और ब्रिटेन जैसे देशों से खरीदा जाता है।

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बिटकॉइन और नोटों का पर्यावरण पर असर

आज के इस दौर में पर्यावरण पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। इसका मुख्य कारण है पेड़ों का कटना। देश में सरकार भले ही पर्यावरण दिवस पर भारी मात्रा में पेड़ लगाने का रिकॉर्ड बनाती हो, लेकिन इसका असर पर्यावरण पर दिखाई नहीं दे रहा है। देश में लगातार पर्यावरण की दुर्दशा खराब होती जा रही है।

वहीं इसका एक कारण भारत में छपने वाली नोट भी है, क्योंकि नोट कागज से बनाई जाती है और कागज पेड़ काटकर बनाया जाता है। अब हम बिटकॉइन के बारे में बात करते हैं। यह एक डिजिटल करेंसी है और इससे हर साल में लगभग 37 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड फैलता है। ऐसे में अगर देखा जाए तो बिटकॉइन पर्यावरण के लिए सबसे खतरनाक साबित हो रहा है।

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