भाजपा पर फिर गिरी गाज, इस दिग्गज नेता ने पार्टी से अचानक दिया इस्तीफा

नई दिल्ली। जहां सभी की निगाहें अब सिर्फ और सिर्फ आने वाले लोकसभा चुनावों पर टिकी हुई हैं। वहीं भाजपा के दिग्गज नेता ने राजस्थान विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पार्टी का साथ छोड़ भाजपा को बड़ा झटका दिया है। पार्टी से बागी हुए विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को इस्तीफा देकर इस बात का खुलासा किया। अब वे अपने नए दल के साथ राजस्थान में विधानसभा चुनावों के लिए कदम बढ़ाएंगे।

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भाजपा पर फिर गिरी गाज

बता दें घनश्याम तिवाड़ी साल 2003 से इस विधानसभा क्षेत्र में अपना दबदबा बनाये हुए हैं। इस लिहाज से ऐसा मान जा रहा है कि उनके पार्टी छोड़ने के बाद भाजपा के लिए यहां अपना परचम लहराना आसान ना होगा। क्योंकि अभी तक पार्टी के लिए जो वोटबैंक जमा करने का काम करते थे, अब वही घनश्याम तिवाड़ी भाजपा के विरोध में काम करेंगे।

पार्टी से अलग होने से पहले ही घनश्याम तिवाड़ी ने अपने एक नए दल ‘भारत वाहिनी पार्टी’ का गठन कर लिया था। इस दल के अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने अपने बेटे को नियुक्त किया था। अब पार्टी से इस्तीफा देने के बाद वे खुली तौर पर अपने इस दल के लिए काम कर पाएंगे।

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खबरों के मुताबिक़ पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को अपना इस्तीफा देने के बाद घनश्याम तिवाड़ी ने ऐलान किया कि अगले विधानसभा चुनाव में वह राज्य की सभी 200 विधानसभा सीटों पर अपनी पार्टी का उम्मीदवार खड़ा करेंगे। तिवाड़ी इस वक्त जयपुर के सांगानेर से बीजेपी के विधायक थे।

भारत वाहिनी पार्टी की पहली बैठक 3 जुलाई को जयपुर में होगी। इस बैठक के लिए 2 हजार कार्यकर्ता, हर विधानसभा से 10 प्रतिनिधियों को न्योता दिया गया है। दीनदयाल वाहिनी के कार्यकर्ता इसी दिन इस नयी पार्टी को ज्वाइन करेंगे।

राजस्थान में इसी साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं। धनश्याम तिवाड़ी ने अपने इस सियासी चाल से राज्य का सियासी तापमान बढ़ा दिया है, साथ ही एंटी इंकंबेंसी फैक्टर झेल रही वसुंधरा की भी मुश्किलों में इजाफा कर दिया है।

बता दें घनश्याम तिवाड़ी राजस्थान बीजेपी के बड़े नेता है। वे पार्टी में कई अहम पदों पर रहे हैं। वे भैरोंसिंह शेखालत मंत्रिमंडल में राज्य के ऊर्जा मंत्री थे। घनश्याम तिवाड़ी वसुंधरा राजे सरकार में भी मंत्री रहे, लेकिन वैचारिक मतभेदों को लेकर उनका सीएम से टकराव हो गया। इसके बाद में वे अपनी ही सरकार के प्रखर आलोचक हो गये।

रिपोर्ट के मुताबिक वसुंधरा जब इन्हें कथित रूप से किनारे करने लगीं तो उन्होंने अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए दीनदयाल वाहिनी नाम से एक संगठन बनाया।

घनश्याम तिवाड़ी ने कहा, “लंबे समय से दीनदयाल वाहिनी और भारत वाहिनी के नेता, कार्यकर्ता और संस्थापक पार्टी के रजिस्ट्रेशन का इंतजार कर रहे थे, अब भारत वाहिनी को रजिस्ट्रेशन मिल गया है हम सभी खुश हैं, घनश्याम तिवाड़ी की अगुवाई में सभी 200 सीटों पर उम्मीदवार उतारेंगे।”

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