इस बड़ी बात की भनक लगते ही शाह-मोदी ने किया ऐलान, छोड़ा पीडीपी का साथ

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में भाजपा और पीडीपी गठबंधन टूटने के बाद से ही ये मामला चर्चा में है। सभी उन पहलुओं को तलाशने की कोशिश में जुटे हुए हैं कि आखिर भाजपा ने अपना समर्थन क्यों वापस लिया। जानकारी के मुताबिक यह बताया जा रहा है कि इस मामले में भाजपा कई दिनों से मंथन कर रही थी। उन्हें पहले से अंदेशा हो गया था कि पीडीपी इस गठबंधन को तोड़ने के फिराक में है और अक्टूबर तक इस बात का ऐलान कर देगी। इस लिहाज से भाजपा ने पहले ही अपना दांव पहले फेंक सभी को चौंका दिया।

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भाजपा और पीडीपी गठबंधन

खबरों के मुताबिक़ भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को संकेत मिल चुके थे कि ऑपरेशन आल आउट के विरोध में मानवाधिकार और मुस्लिमों के हक को मुद्दा बनाकर पीडीपी सितंबर-अक्टूबर तक सरकार गिरा सकती है। इसके बाद से भाजपा गठबंधन पर मंथन कर रही थी।

बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने तमाम पहलू देखने के बाद देश की अखंडता और राष्ट्रवाद के नाम पर गठबंधन से हटने का फैसला किया। राज्य, खासतौर पर जम्मू में भाजपा-संघ कैडर में नाराजगी की रिपोर्ट शाह को मिली थी।

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कैडर में ऊर्जा लाने के लिए ऑपरेशन ऑल आउट तेज करने की रणनीति भी तैयार की गई है। रमजान में 300 ऐसे कट्टरपंथियों की लिस्ट बनाई गई है, जो युवाओं को आतंकवाद की ओर धकेल रहे हैं।

भाजपा के एक नेता का कहना है कि ऑपरेशन में यूनीफाइड कमांड का मुखिया मुख्यमंत्री होता है। ऐसे में महबूबा मुफ्ती अड़चन बन सकती थीं। यही वजह रही कि भाजपा ने गठबंधन तोड़कर राज्यपाल शासन लागू कराने का फैसला लिया।

भाजपा का दावा है कि आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई में पीडीपी का पूरा सहयोग नहीं था। एक सूत्र ने बताया कि सितंबर-अक्टूबर में पीडीपी के अलग होने के फैसले के बाद ऑपरेशन ऑलआउट तेज करते तो बर्फबारी की वजह से दिक्कतें आतीं। लोकसभा चुनाव से पहले नतीजा भी नहीं मिलता।

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