कांग्रेस के उपवास को भाजपा ने बताया नाटक, कहा- सिर्फ करना चाहते हैं राहुल को लांच

नई दिल्ली| दलित उत्पीड़न मुद्दे को लेकर देशभर में किये जा रहे एकदिवसीय उपवास को लेकर केंद्र की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तंज कसा है। दरअसल, भाजपा ने कांग्रेस के इस उपवास को महज नाटक करार दिया है। भाजपा का कहना है कि वे सिर्फ अपने अध्यक्ष राहुल गांधी को लांच करना चाहते हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सोमवार को उपवास के लिए जैसे ही राजघाट पहुंचे, भाजपा ने कांग्रेस और उसके शीर्ष नेताओं को दलित नेता भीमराव आंबेडकर के साथ तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू सहित अन्य पार्टी नेताओं के कथित दुर्व्यवहार की याद दिलाई।

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने यहां संवाददाताओं से कहा कि कांग्रेस दलित तुष्टीकरण की राजनीति नेहरूजी के जमाने से कर रही है। आज (सोमवार) वे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को लांच करने के लिए नाटक कर रहे हैं। कांग्रेस अपने नेता को लांच करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है।

कांग्रेस अध्यक्ष पर कर्नाटक में विधानसभा चुनाव से पहले विभाजनकारी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए भाजपा नेता ने कहा कि राहुल गांधी कर्नाटक राज्य में दलितों के खिलाफ अत्याचारों की तरफ से मुंह नहीं फेर सकते, क्योंकि वहां कांग्रेस का शासन है।

पात्रा ने कांग्रेस पर ऐसे मौकों का फायदा उठाकर राहुल गांधी को अपने नेता के तौर पर लांच करने का आरोप लगाया और कहा कि गुजरात में आपने पाटीदारों के नाम पर समाज को बांटने की कोशिश की। हरियाणा में जाट आरक्षण की मांग करके आपने वही कोशिश की। मध्य प्रदेश में आप मंदसौर जाकर किसानों के साथ होने का दिखावा करते रहे, जबकि कैमरे में आपके नेता हिंसा भड़काते देखे गए।

भाजपा नेता ने कहा कि राहुल गांधी कर्नाटक में भूख हड़ताल क्यों नहीं करते, जहां कांग्रेस राज में दलितों पर अत्याचार के 9,080 मामले दर्ज हैं, 358 दलितों की हत्या हो चुकी है और 809 दलित महिलाओं का शोषण हुआ है। उन्होंने सवाल किया कि ये दोहरी मानसिकता क्यों? क्या कर्नाटक के दलित, दलित नहीं हैं?

भाजपा के एक अन्य प्रवक्ता विजय सोनकर शास्त्री ने राहुल गांधी के उपवास को नाटक करार दिया। उन्होंने राहुल गांधी पर सर्वोच्च न्यायालय के 20 मार्च के निर्णय के बाद देश का माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह राहुल गांधी का दलितों के लिए प्यार नहीं है। हिंसा फैलाने के बाद वे अहिंसा का नाटक कर रहे हैं।

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