जिसने खुद को बताया था मोदी सरकार का सबसे बड़ा दुश्मन, अब उसी को दोस्त बनाना चाह रही बीजेपी

मुंबई। अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव में केंद्र की सत्तारूढ़ मोदी सरकार एकजुट हो रही विपक्षी एकता के सामने कमजोर नजर आने लगी है। अभी हाल ही में हुए कर्नाटक विधानसभा चुनाव और देश के कई राज्यों में हुए उपचुनावों में भाजपा को जिस तरह से शिकस्त का सामना करना पड़ा है, पार्टी आला कमान के लिए चिंता का विषय बन गया है। इसी के चलते भाजपा ने अब नाराज चल रहे राजग के पुराने घटकों को मनाने की कवायद शुरू कर दी है। अगर भाजपा अपने इस मकसद में कामयाब रहती है तो यह विपक्षी एकता के लिए तगड़ा झटका हो सकता है।

दरअसल, लोकसभा चुनाव-2019 में जहां विपक्ष एकजुट होकर भाजपा की सत्ता को उखाड़ फेंकने की जद्दोजहद में लगी हुई है। वहीँ भाजपा नीत राजग के कई घटक ही केंद्र सरकार से नाराज चल रहे हैं, कई घटक तो बगावती रुख अपनाने हुए केंद्र सरकार पर बराबर हमला तक कर रहे हैं। इसी वजह से भाजपा अपने रूठे हुए सहयोगियों को मनाने की कवायद में जुट गई है। इसी कड़ी में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह बुधवार को शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से मुलाक़ात करेंगे।

बीते काफी समय से भाजपा और शिवसेना के संबंधों में खटास देखने को मिल रही है। शिवसेना महाराष्ट्र की भाजपा सरकार और केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ बराबर हमला बोले हुए है। कभी किसानों का मुद्दा उठाते हुए तो कभी पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों को लेकर शिवसेना बराबर भाजपा सरकार को आड़े हाथों ले रही है। यह वही शिवसेना है जिसने बीते दिनों खुद को भाजपा का सबसे बड़ा दुश्मन करार दिया था।

केवल इतना ही नहीं शिवसेना ने बीते दिनों यह भी साफ़ कर दिया था कि अब वह भाजपा के साथ मिलकर कोई चुनाव नहीं लड़ेगी। बीते दिनों हुए पालघर उपचुनाव में ऐसा हुआ भी। इस उपचुनाव में भाजपा और शिवसेना ने एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा था।

आपको बता दें कि वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा और शिवसेना ने एक-दूसरे के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में दोनों ही दलों ने महाराष्ट्र की 48 लोकसभा सीटों में से 42 सीटों पर जीत दर्ज किया था। ऐसे में बीजेपी बिल्कुल नहीं चाहेगी कि उसका साथी छिटके और सीटों में उसे नुकसान उठाना पड़े।

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