चुनाव को लेकर बीजेपी ने तैयार किया ऐसा फार्मूला, कट जाएंगे करीब 150 बड़े नेताओं के टिकट

नई दिल्ली: केंद्र की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव हैं। लेकिन इस आम चुनाव के साथ ही भाजपा को उन राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में भी अपनी सत्ता बरकरार रखनी है, जहां अभी भाजपा का ही शासन है। भाजपा ने इन राज्यों और आम चुनाव में अपने विजय रथ को आगे बढ़ाने की रणनीति भी तैयार कर ली है। ऐसा ही एक फार्मूला भाजपा ने राजस्थान चुनाव में जीत हासिल करने के लिए बनाया है। इस फार्मूले के तहत चुनाव में जो भी उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतारा जाएगा उसे संगठन का कोई भी दायित्व नहीं सौंपा जाएगा।

मिली जानकारी के अनुसार, राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव और अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा ने नया  किया है। इस फार्मूले के तहत भाजपा आला कमान ने निर्णय लिया है कि जो लोग संगठन में काम करेंगे उन्हें चुनाव में टिकट नहीं दिया जाएगा और जिन्हे चुनाव में टिकट दिया जाएगा उन्हें संगठन का कोई भी दायित्व नहीं सौंपा जाएगा। इसके अलावा संगठन का काम करने के लिए जिन लोगों को शामिल किया जाएगा उन्हें कई नई जिम्मेदारियां भी सौंपी जाएगी।

इस बात की जानकारी भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल ने पिछले दिनों संपन्न हुई कार्यसमिति की बैठक में संगठन प्रभारियों और जिलाध्यक्षों से बातचीत करते हुए दी।

दरअसल, भाजपा नेताओं का मानना है कि जो लोग संगठन से जुड़े हुए हैं, यदि वे चुनाव में खड़े होते हैं तो संगठन का काम सही से नहीं कर पाते। साथ ही अपने चुनावी क्षेत्र में भी अपना 100 प्रतिशत नहीं दे पाते। उनकी जिम्मेदारियां बढ़ जाती है। यह भी होता है कि चुनाव लड़ने की इच्छा की वजह से वे संगठन के काम पर अपना पूरा ध्यान नहीं दे पाते हैं। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए भाजपा ने यह तय किया है कि संगठन में काम करने वाले लोगों को टिकट नहीं दिया जाएगा। यदि संगठन के किसी व्यक्ति को टिकट दिया जाता है तो उन्हें अन्य जिम्मेदारियों से मुक्त किया जाएगा।

साथ ही रामलाल ने यह भी कहा कि किसे टिकट देना है और किसे नहीं देना है, यह शीर्ष नेतृत्व तय करेगा। संगठन के नेताओं को टिकट प्राप्त करने की कोशिश में नहीं रहना चाहिए।

रामलाल की बातों के अनुसार यदि भाजपा आगामी चुनाव में टिकट बांटती है तो इससे करीब 150 नेता प्रभावित होंगे। इनमें संगठन प्रभारी, जिलाध्यक्ष, प्रदेश पदाधिकारी से लेकर मोर्चा की टीम तक शामिल है। संगठन के प्रदेश महामंत्री अभिषेक मटोरिया, प्रदेश उपाध्यक्ष अलका गुर्जर सहित कई संगठन के सदस्य हैं। ऐसी स्थिति में या तो इन्हें संगठन से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा या फिर इनका टिकट काटा जाएगा।

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