जिस ‘कुंड’ से बढ़ा मोदी लहर का प्रताप, वहीं से फिर शुरू हुआ मिशन 2019

नई दिल्ली। साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों के साथ इस साल के अंत तक होने वाले चुनावों के लिए भाजपा कोई भी कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती। इसके लिए नई रणनीति और प्लानिंग की जानी बेहद जरूरी है। कर्नाटक चुनाव और फिर बाद में हुए उपचुनावों के आए नतीजों ने एक बार फिर भाजपा को सोचने पर मजबूर किया है। इस कारण अब भाजपा एक बार फिर मंथन करना चाह रही है, ताकि बीते चुनावों में जो खामिया और कमियां रह गई थीं, उन्हें दूर किया जा सके।

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साल 2019

पीएम मोदी ने इसके लिए आज यानी शुक्रवार का दिन निर्धारित किया है। पीएम मोदी ने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख नेताओं को रात्री भोज पर आमंत्रित किया है।

माना जा रहा है कि इस भोज के तहत एकत्रित होने वाले नेताओं के बीच तगड़ा मंथन होने वाला है। जो भविष्य में होने वाले चुनावों में भाजपा की मजबूत दावेदारी के लिए अहम माना जा रहा है।

बता दें भाजपा के लिए सूरजकुंड बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि 2014 में बीजेपी की जीत की स्क्रिप्ट यहीं लिखी गई थी। बीजेपी इससे पहले सूरजकुंड में सितंबर 2012 में राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक भी आयोजित कर चुकी है, जिसमें पार्टी ने यूपीए सरकार को उखाड़ फेंकने का आह्वान किया था।

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वहीं जून 2014 में बीजेपी के तकरीबन 200 नवनिर्वाचित सांसदों को ट्रेनिंग देने का आयोजन भी सूरजकुंड में किया गया था।

इसके अलावा यूपी, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर के विधानसभा चुनावों से पहले 10 सितंबर 2016 को भी सूरजकुंड में ही देशभर के संगठन मंत्रियों की मीटिंग आयोजित की गई थी, जिसमें 5 राज्यों में जीत हासिल करने की योजना बनाई गई। हालांकि पार्टी पंजाब को छोड़ अन्य 4 में सरकार बनाने में कामयाब रही थी।

खबरों के मुताबिक़ वैसे तो यह नेताओं के साथ पीएम मोदी की रूटीन बैठक है और पीएम हर साल अपने चुनिंदा नेताओं के साथ बैठक करते रहे हैं। लेकिन इस बार इसे आगामी चुनावों और खासकर लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए काफी अहम माना जा रहा है।

बता दें गुरुवार को भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) एवं उसके अनुषांगी संगठनों के वरिष्ठ पदाधिकारियों की बैठक हरियाणा के सूरजकुंड में शुरू हो चुकी है और यह तीन दिनों तक चलेगी।

मिशन लोकसभा 2019 की रणनीति तैयार करने की दृष्टि से इस बैठक को काफी महत्व दिया जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि बैठक की अनौपचारिक शुरूआत हो गई है।

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सूत्रों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि प्रधानमंत्री ने इस तरह का भोज पिछले साल भी आयोजित किया था। चूंकि वह संघ परिवार का हिस्सा हैं इसलिए वह नेताओं से एक नियमित अवधि के बाद मिलते रहते हैं।

यह मीटिंग उस समय हो रही है जब भाजपा राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटा है।

बता दें कि भाजपा दो राज्यों में लंबे समय से शासन कर रही है और उसे सत्ता में बने रहने के लिए आरएसएस की सहायता पड़ सकती है। क्योंकि संभव है कि छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में भाजपा को सत्ता विरोधी लहर से जूझना पड़े।

वैसे आरएसएस सत्ता और चुनावी प्रक्रिया से दूरी बना कर रखती है। फिर भी यह बात जगजाहिर है कि उसका कैडर भाजपा को चुनावी मैदान में सहायता करता रहा है।

सूत्र ने बताया कि सूरजकुंड में होने वाली मीटिंग भाजपा की सालाना बैठक का ही हिस्सा है जिसमें भाजपा और आरएसएस के नेता भविष्य की योजनाओं पर विचार विमर्ष करते हैं।

बताया जा रहा है कि इस मीटिंग में आरएसएस के सर कार्यवाह सुरेश भय्याजी जोशी,  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले और कृष्णा गोपाल शामिल हो रहे हैं। वहीं भाजपा अध्यक्ष अमित शाह इस मीटिंग में शनिवार को हिस्सा ले सकते हैं।

इस सम्मेलन में हर दिन 4 सत्र होंगे और इस दौरान 2019 में होने वाले चुनावी अभियानों में पार्टी कैसे कैडर और वोटर का प्रयोग कर सकती है, इस पर चर्चा करेगी।

सम्मेलन में इस बात पर भी चर्चा होगी कि संघ और भाजपा के बीच तालमेल को और मजबूत बनाया जा सकता है।

साथ ही यह भी खबर है कि सम्मेलन पर उन संसदीयों सीटों पर भी फोकस किया जाएगा, जहां पार्टी चुनावों में दूसरे नंबर रही है।

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