2019 के लिए भाजपा की तैयारी सपा-बसपा गठबंधन पर पड़ सकती है भारी

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उत्तर प्रदेश: सपा-बसपा गठबंधन की मजबूत होती सियासत से पार पाने के लिए भाजपा में माथापच्ची का संग्राम शुरू हो चुका है। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने शनिवार को राष्ट्रीय परिषद की बैठक के बाद विस्तारकों, प्रदेश अध्यक्ष, संगठन मंत्री और सह प्रभारियों के साथ लंबी बैठक की। जिसमें पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में पार्टी के साथ आए गैर यादव ओबीसी और गैर जाटव दलित वोटों को हर हाल में अपनी ओर आकर्षित करने के निर्देश दिए। सपा-बसपा के गठजोड़ के ओबीसी-दलित गठबंधन के रूप में धारणा न बने, इससे बचाव के लिए पार्टी ने इसे यादव-जाटव गठबंधन के रूप में जनता के समक्ष प्रस्तुत करने की भी रणनीति बनाई है।

शाह ने हर हाल में 50 फीसदी मत हासिल करने के लिए विस्तारकों से पूरी ताकत झोंकने को कहा है। बैठक में शामिल एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में पार्टी की प्रचंड जीत का कारण मूल सवर्ण वोटरों के साथ ही गैर यादव ओबीसी के बड़े और गैर जाटव दलित के छोटे तबके का पार्टी के साथ जुड़ाव था। शाह की रणनीति  मुताबिक,  सभी धर्मों के सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण से अगड़ा वर्ग पार्टी के साथ पहले से जुड़ा हुआ है। चिंता इस बात की है कि सपा-बसपा गठबंधन के बाद बीते दो चुनाव में पार्टी के पक्ष में खड़ा हुआ गैर यादव ओबीसी और गैर जाटव दलित वोट बैंक में कहीं सेंध न लग जाए। इससे बचने के लिए पार्टी यह संदेश देने की कोशिश करेगी कि यह पिछड़ा-दलित गठबंधन नहीं बल्कि यादव-जाटव गठबंधन है। इस क्रम में पार्टी इन दोनों दलों में गठबंधन से नाराज वर्ग को भी साधने की योजना बनाएगी। यही कारण है कि शाह ने इस वर्ग को साधे रखने के साथ ही पार्टी के मिशन 50 फीसदी को हर हाल में अमली जामा पहनाने का निर्देश दिया है।

पुराने सहयोगियों को जोड़े रखने का आह्वान

बैठक में तीन राज्यों में पार्टी की हार के बाद तेवर दिखा रहे अपना दल और सुहेल देव भारतीय समाज पार्टी को जोड़े रखने के अलावा छोटे-छोटे जातिगत समूहों को चिह्नित कर इन्हें पार्टी से जोड़ने की रणनीति बनी। पार्टी सूत्रों के अनुसार, सपा-बसपा गठबंधन के बाद पार्टी एनडीए का कुनबा बिखरने का संदेश नहीं देना चाहती है। एनडीए से किसी दल के अलग होने पर राज्य के मतदाताओं में सपा-बसपा गठबंधन के मजबूत होने के साथ ही इसके भय से एनडीए के बिखरने का भी सियासी संदेश जाएगा। जिससे भाजपा को आगामी आम चुनाव में भारी नुकसान ,उठाना पड़ ,सकता है। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह इसी महीने राज्य का दौराकर गठबंधन सहयोगियों से जुड़े मामलों को देखेंगे।

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