गोरखपुर में तो BJP-SP गठबंधन हो गया भाई !

वेद प्रकाश पाठक

BJP-AND-SP20150401092340_lगोरखपुर। बहुत पुरानी रणनीति है कि दुश्मन का दुश्मन अपना दोस्त होता है। गोरखपुर के जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में कुछ यही फार्मूला लागू हो गया। यहां ऐसा सियासी कमाल हुआ है जो अध्यक्ष पद का परिणान आने के बाद सबकी जुबां पर है। विधायक विजय बहादुर ने भाजपा से बगावत की थी और पार्टी ने उस बगावत का हिसाब-किताब जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में चुकता कर लिया।

हां, इसकी कीमत बड़ी रोचक रही। अपने बागी को सबक सिखाने के लिए पार्टी ने समाजवादी पार्टी के साथ अंदरूनी गठनबंधन कर लिया और भाजपा के जिला पंचायत सदस्यों ने सपा प्रत्याशी गीतांजली यादव को वोट दिया।

विश्वस्त सूत्रों का दावा है कि इस गठबंधन के कारण सपा को दस भाजपाई वोट मिले। यानी जिन सात वोटों से गीतांजली जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं वे सब के सब भाजपाई थे। जनपद के जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा ने अपना कोई प्रत्याशी नहीं उतारा था। जबकि भाजपाई विचारधारा के 17 और हिन्दूत्व बिग्रेड से ताल्लुक रखने वाले 4 जिला पंचायत सदस्य इस बार चुनकर आए थे। कहने को तो पार्टी ने सभी जिला पंचायत सदस्यों को स्वतंत्र तरीके से वोटिंग की छूट दे रखी थी लेकिन अंतिम समय में पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने लॉबिंग कर दिया। यह लॉबिंग समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी गीतांजली यादव के पक्ष में थी।

महंगा पड़ा योगी से पंगा

राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि विजय बहादुर यादव को भाजपा से ज्यादा सांसद योगी आदित्यनाथ से पंगा लेना महंगा पड़ा। लोकसभा चुनाव में भाजपा के बागी विधायक विजय बहादुर ने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी का प्रचार किया था, ऐसा उन पर आरोप है। कभी योगी के सबसे सगे रहे विजय के रिश्ते लोकसभा चुनाव के बाद योगी से टूट गए। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा सांसद ने खुलकर तो कोई स्टैंड नहीं लिया लेकिन उनके करीबियों ने सपा प्रत्याशी के पक्ष में माहौल तैयार कर दिया। भाजपा नेताओं और योगी के लोगों के इस माहौल के कारण जिला पंचायत में भाजपा और सपा के सदस्यों का गठबंधन बन गया।

सपा के करीब रहे भाजपा विधायक

भाजपा और योगी से तल्ख होते रिश्तों के बीच विधायक विजय बहादुर समाजवादी पार्टी के काफी करीब आ गए थे। सरकार की मदद से उन्हें काफी विकास कार्य कराने का भी मौका मिला। जब विधायक के भाई अजय बहादुर का सपा से टिकट कटा तो पार्टी को यह इल्म भी नहीं था विधायकजी सरकार के खिलाफ खड़े हो जाएंगे। जब बसपा का दामन थामकर विधायक ने सपा के खिलाफ झंडा बुलंद कर दिया तो गोरखपुर जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव सरकार की नाक का सवाल हो गया।

जेल गए दो जिला पंचायत सदस्य

भाजपा के बागी विधायक विजय बहादुर यादव का साथ देना दो जिला पंचायत सदस्यों पर भारी पड़ गया। दोनों को पुराने आपराधिक मामले में पुलिस ने जेल भेज दिया है। सपा से निष्कासित नेता कुंवर प्रताप सिंह के भाई जितेन्द्र सिंह हत्या के अभियुक्त थे और वे जिला पंचायत सदस्य चुने गये थे। वोट डालने के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्त में लिया और जेल भेज दिया। एक और आरोपी पवन सिंह को मौके पर सपाइयों ने पीटकर पुलिस के सुपुर्द कर दिया था। वह बिना वोट डाले जेल चले गए।

विधायक का अनशन खत्म

भाजपा के बागी विधायक विजय बहादुर यादव ने टाउनहाल पर बीती रात से शुरू किया धरना समाप्त कर दिया है। उन्होंने तय किया है कि अब पूरे चुनाव को कोर्ट ले जाएंगे और इसे अवैध घोषित कराएंगे। उनकी मांग है कि केन्द्रीय पर्यवेक्षक की निगरानी में फिर से निष्पक्ष चुनाव कराया जाए। कलेक्ट्रेट के अधिवक्ताओं ने जू पिलाकर विधायक और सपा से निष्कासित नेता कुंवर प्रताप सिंह का धरना खत्म कराया।

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