बीजेपी को 39 साल के इतिहास को बदलने की है चुनौती, मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ हैं सामने

छिंदवाड़ा क्षेत्रफल की दृष्टि से छिंदवाड़ा जिले की गिनती प्रदेश में बड़े जिले में होती है। इस जिले में 39 सालों से वर्तमान मुख्यमंत्री कमलनाथ की बादशाहत बरकरार रही है। इसके बाद उनके बेटे नकुलनाथ चुनाव मैदान में हैं। नकुलनाथ के लिए भले ही यह पहला चुनाव है, लेकिन पिता की राजनीतिक विरासत उनके काम आ रही है। वहीं बात करें भाजपा की तो पार्टी ने आदिवासी कार्ड खेलते हुए जुन्नारदेव के पूर्व विधायक नत्थनशाह कवरेती को मैदान में उतारा है।

आदिवासी बहुल जिले में ये पहला मौका है, जब लोकसभा के लिए किसी आदिवासी नेता को टिकट दिया गया हो। भौगोलिक रूप से जिले में अलग-अलग तासीर है। जुन्नारदेव, तामिया, हर्रई और अमरवाड़ा क्षेत्र आदिवासी बहुल हैं। इन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विकास ही बड़ी चुनौती है। वहीं सौंसर और पांढुर्णा में संपन्न किसान हैं। परासिया क्षेत्र की पहचान कोयल खदानों से है। इस कोयलांचल क्षेत्र में बेरोजगारी और बंद होती खदानें मुख्य मुद्दा है।

लोकसभा चुनाव में जहां केंद्र सरकार के काम की कसौटी है, वहीं प्रदेश सरकार के तीन महीने का भी पैमाना है। ऐसे में मतदाता भी अपनी राय खुलकर रख रहा है। फिलहाल चुनाव प्रचार ज्यादा नजर नहीं आ रहा है। लेकिन स्थानीय, प्रादेशिक और राष्ट्रीय मुद्दों की गूंज यहां सुनाई दे रही है। क्षेत्र का विकास हो, लेकिन हितों का रखें ख्याल पानी पुरी की दुकान चलाकर गुजारा करने वाले खूनाझिर खुर्द के प्रकाश सोनी ने कहा कि सांसद ऐसा हो जो क्षेत्र का विकास करे। कानून व्यवस्था भी बेहतर हो।

हायर सेकंडरी पास प्रवीण मर्सकोले का कहना है कि वे फिलहाल बेरोजगार हैं। प्रवीण कहते हैं कि सांसद ऐसा होना चाहिए जो क्षेत्र का विकास करने के साथ ही युवाओं को रोजगार मुहैया कराए। हर्रई निवासी किसान राजेश नेमा का कहना है कि विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने कर्जमाफी का वादा किया था, लेकिन अब आचार संहिता की आड़ लेकर कर्जमाफी से किनारा किया जा रहा है। कर्जमाफ नहीं होने के कारण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर किसानों में निराशा है।

छिंदवाड़ा शहर की पहाड़े कॉलोनी निवासी अंशुल पहाड़े का कहना है कि देशहित सर्वोपरि है। सरकार देश की सुरक्षा में समझौता न करे। जिले के चर्चित मुद्दे जिले में बंद हो रही कोयला खदानें और उद्योग सबसे बड़ा मुद्दा है। कोयला खदानें और कई उद्योग बंद होने से बेरोजगार बढ़ी है। युवा दूसरे जिलों या अन्य प्रदेशों के लिए पलायन कर रहे हैं। कृषि महाविद्यालय खोलने की मांग कई वर्षों से की जा रही है। लेकिन जमीन आवंटन के बाद बात आगे नहीं बढ़ी। छिंदवाड़ा-नैनपुर ब्रॉडगेज रेलवे लाइन का काम बजट की कमी से धीमी गति से चल रहा है।

चुनावी समीकरण संसदीय क्षेत्र में 30 फीसदी से ज्यादा आबादी आदिवासी है। भाजपा ने नत्थन शाह कवरेती को मैदान में उतारा है। देरी से प्रत्याशी की घोषणा के कारण प्रचार का समय उन्हें कम मिल पाएगा। वहीं गोंगपा के पूर्व विधायक मनमोहन शाह बट्टी भी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। वे भी आदिवासी नेता हैं। कांग्रेस प्रत्याशी नकुलनाथ और उनके मुख्यमंत्री पिता कमलनाथ एक माह से क्षेत्र में लगातार दौरे कर रहे हैं।

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