हरियाणा में Black Fungus का अटैक, 226 केस बढ़े, जानें बीमारी से बचने के उपाय

हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने बताया कि अभी तक ब्लैक फंगस के 226 मामले सामने आए हैं, केंद्र सरकार से भी दवा मांगी गई है

चंडीगढ़: हरियाणा (Haryana) के गृह मंत्री अनिल विज ने बताया कि अभी तक ब्लैक फंगस (Black Fungus) के 226 मामले सामने आए हैं। हमने इसके लिए सभी मेडिकल कॉलेज में 20-20 बेड में वार्ड रिजर्व किए हैं। दवाई भी हम उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहे हैं। हम बाहर से भी दवाई मंगवाएंगे। केंद्र सरकार से भी हमने अपने हिस्से की दवा मांगी है।

दिल्ली (Delhi) के स्वास्थ्य मंत्री के ने कहा कि, ब्लैक फंगस की दवाई को केंद्र सरकार ने नियंत्रित किया है वो सबको कोटे के हिसाब से दे रही है। केंद्र सरकार ने दिल्ली को 2000 दवाई देने के लिए कहा है।

क्या होता है म्यूकोर्मिकोसिस (ब्लैक फंगस)

‘ब्लैक फंगस’ नाम की बीमारी म्यूकोर्मिकोसिस (Mucormycosis) नाम के फंगाइल से पैदा होती है। इस बीमारी का समय पर इलाज नहीं हुआ तो मरीज की जान भी जा सकती या फिर मरीज की आंख निकालनी पड़ सकती है। ये बीमारी अधिकतर उन लोगों में ज्यादा  होता है जो (Wet Condition) नमी वाले जगह में रहते है। जिनका इम्यूनिटी सिस्टम कमजोर होता है। जो शुगर के मरीज है। या ऐसी दवा लेते हो जो इम्यूनिटी (Immunity) को कमजोर करती हैं। ऐसे लोगों में ‘ब्लैक फंगस’ का खतरा और ज्यादा होता है।

लेकिन कोरोना वायरस के दूसरी लहर में ‘ब्लैक फंगस’ अचानक तेजी से फैल रही है। इसका मुख्य कारण यह है कि, कोरोना के सीरीयस मरीजों को डॉक्टर इलाज के दौरान स्टेरॉयड (Steroid tablets) टैब्लेट  देते है इससे शुगर लेवल बढ़ता है। लेकिन इम्यून सिस्टम कमजोर होता है। इसलिए कोरोना के मरीजों को ठीक होने के बाद ‘ब्लैक फंगस’ होने की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है। इस वक्त ब्लैक फंगस के ज्यादातर मरीज वो हैं जो कोरोना (Corona) से ठीक हो चुके  हैं।

‘ब्लैक फंगस’ के लक्षण-

  1. आंखों का लाल होना
  2. होठों पर सूजन
  3. थकान और सिर दर्द
  4. धड़कन तेज,
  5. सीने में दर्द होना
  6. हाथों और पैरों में सूजन
  7. शरीर पर गांठ बनना
  8. लगातार बुखार
  9. उल्टी और पेट दर्द
  10. त्वचा पर चकते
  11. बुखार और खांसी-जुकाम
  12. थकान और दस्त
  13. गले में खराश
  14. मांसपेशियों में दर्द
  15. सांस लेने में दिक्कत

फंगस से बचने के उपाय-

  1. दिल्ली AIIMS में न्यूरोलॉजी विभाग की डॉक्टर एमवी पद्म श्रीवास्तव के मुताबिक स्टेरॉयड नहीं लेना चाहिए।
  2. ओवर द काउंटर दवाएं नहीं लेना चाहिए।
  3. खुद से ही दवाई लेने से बचना चाहिए।
  4. मधुमेह यानी की शुगर के मरीज अपना शुगर कंट्रोल करें।
  5. एंटी बायोटिक दवाएं सोच-समझकर लें।
  6. सावधानी बरतें।
  7. साफ-सफाई का ध्यान रखें।
  8. जिससे ऑक्सीजन जानें के रास्ते साफ रहें।

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