Black Fungus: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसे बताया ब्लैक फंगस का मुख्य कारण

 देश में अभी तक कोरोना की मार झेल रहें लोगों को अब ब्लैक फंगस नामक नई बिमारी का डर सता रहा है।

नई दिल्ली: देश में अभी तक कोरोना की मार झेल रहें लोगों को अब ब्लैक फंगस नामक नई बिमारी का डर सता रहा है। ब्लैक फंगस के मामले देश में तेजी से सामने आ रहे हैं। ऐसे में केंद्र व राज्य सरकारों की चिंता बढ़ने लगी है। इस बीच ब्लैक फंगस को लेकर एक स्टडी सामने आई है। यह स्टडी 210 मरीजों पर की गई है। इस अध्ययन में सभी कोरोना मरीजों को Azithromycin, Doxycycline और Carbapenems एंटीबायोटिक्स दिए गए। इसके बाद ही मरीज ब्लैक फंगस के शिकार हो गए।

आपको बता दें कि बता दें कि मध्य प्रदेश के महाराजा यशवंतराव अस्पताल में डॉ. वीपी पांडे द्वारा इस स्टडी को लिखा गया है। इस स्टडी में दावा किया गया है कि ब्लैक फंगस के मरीज मिले हैं। उन लोगों में से सिर्फ 14 फीसदी लोगों पर ही स्टेरॉयड का इस्तेमाल किया गया था। बता दें कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा स्टेरॉयड को ही ब्लैक फंगस का मुख्य कारण बताया गया था।

9,000 से अधिक मामले सामने

वर्तमान की बात करें तो लगभग 9,000 से अधिक मामले सामने आ चुके है। इतना ही नहीं कई राज्यों के द्वारा इस बिमारी को महामारी करार दे दिया गया है। बता दें छोटे व बड़े सभी शहरों में ब्लैक फंगस के मामले देखने को मिल रहे हैं। बता दें कि ब्लैक फंगस से संक्रमित होने का खतरा उन लोगों को भी है जिनका डायबिटीज लेवल नियंत्रित नहीं है। हालांकि स्टडी में केवल 21 प्रतिशत ही मरीज ऐसे थे जिनमें डायबिटीज के लक्षण नहीं थे।

स्टडी के मिुताबिक ब्लैक फंगस से पीड़ित मरीजों में एक और चीज कॉमन पाई गई है, वह ये हैं कि अधिक मात्रा में स्टीम लेना भी मरीजों के लिए हानिकारक साबित हो रहा है। IMA के डॉ। राजीव जयवर्धन के मुताबिक शरीर में एक परत होती है जो इस तरह की बैक्टीरिया से हमें बचाती है. लेकिन स्टीम की अधिक मात्रा इसे नुकसान पहुंचाती है जिस कारण लोगों पर ब्लैक फंगस का असर ज्यादा होता है।

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