कॉरपोरेट्स के साथ रोमांस न करे सरकार

नई दिल्ली।  भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने लेबर लॉ रिफॉर्म्स को ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनस’ से अलग करने की मांग की है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ी इस ट्रेड यूनियन ने इस बारे में सरकार को लिखा है।

आने वाले बजट से पूर्व की गई इस मांग में कहा गया है कि गवर्नमेंट एजेंसियों के साथ काम करने वाले कॉन्ट्रैक्ट लेबर को नियमित किया जाए। बीएमएस ने कहा  कि भारत सरकार का अब भी यह मानना है कि लेबर कॉस्ट में कटौती और लेबर लॉ में ढील ईज ऑफ डूइंग बिजनस (कारोबार को आसान बनाना) के प्रायरिटी इंडिकेटर्स हैं।

ऐसे में बीएमएस मांग करती है कि लेबर कॉस्ट या लेबर लॉ रिलैक्सेशन से जुड़े रेफरेंस को तत्काल प्रभाव से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस इन इंडिया से जुड़े सभी दस्तावेजों से हटा दिया जाना चाहिए।’

ट्रेड यूनियन ने कहा है, ‘देश में क्वॉलिटी जॉब्स खत्म हो रहे हैं। गवर्नमेंट जॉब्स समेत ज्यादातर नौकरियां धीरे-धीरे अस्थायी हो रही हैं। ऐसे में कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वालों को नियमित किया जाए और उन्हें उस इंडस्ट्री के रेग्युलर वर्कर की तरह वेतन और दूसरे बेनेफिट्स दिए जाएं।’ सोशल सेक्टर की कई स्कीमों के बजट में भारी-भरकम कटौती करने के साथ उन्हें स्टेट गवर्नमेंट्स को ट्रांसफर करने को लेकर आरएसएस से संबद्ध ट्रेड यूनियन ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उसने इनडायरेक्ट टैक्स में बढ़ोतरी करने की भी निंदा की है।

बीएमएस ने पिछले साल के बजट पर असहमति जताते हुए कहा है, ‘पिछले साल के बजट में सोशल सेक्टर वेलफेयर को राज्य सरकारों के कंधे पर डाल दिया गया। सोशल सेक्टर मिनिस्ट्रीज के लिए बजट खर्च को जीडीपी के 1.92 फीसदी से घटाकर 1.68 फीसदी कर दिया गया। सोशल सेक्टर स्कीमों को आवंटित किए जाने वाले फंड्स में 4.40 लाख करोड़ रुपये की अप्रत्याशित कटौती की गई। इनडायरेक्ट टैक्स में बढ़ोतरी की गई, जिसका बोझ आम जनता को उठाना पड़ता है।

वहीं, हाई इनकम ग्रुप द्वारा वहन किए जाने वाले डायरेक्ट टैक्स को घटाया गया। कॉर्पोरेट टैक्स को 30 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी करने की बात कही गई है। कॉर्पोरेट्स और बड़ी इंडस्ट्रीज को कई तरह की रियायतें दी गईं।’ बीएमएस ने कहा है, ‘फाइनैंस मिनिस्ट्री को अलग सोशल सेक्टर अफेयर्स डिपार्टमेंट बनाना चाहिए, जो मिनिस्ट्रीज, एक्सपर्ट्स और ऐसे सेक्टर्स के रिप्रेजेंटेटिव्स के साथ तालमेल बनाए, ताकि लोगों को सीधे लाभ मिले।’ इस पृष्ठभूमि में आरएसएस से संबद्ध ट्रेड यूनियन ने कॉर्पोरेट और बड़ी इंडस्ट्रीज के साथ ‘बहुत ज्यादा रोमांस’ करने को लेकर सरकार को चेताया है। साथ ही याद दिलाया है कि फाइनैंस मिनिस्ट्री को कॉर्पोरेट अफेयर्स से दूरी बनाए रखना चाहिए और लौकिक ‘लक्ष्मण रेखा’ को पार नहीं करना चाहिए

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