मायावती का साथ छोड़ अखिलेश संग हो लिए इन्द्रजीत

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लखनऊ| उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती धीरे-धीरे अकेले पड़ती जा रही है। बसपा नेताओं द्वारा पार्टी छोड़ने का सिलसिला अभी भी जारी है। इस बार बसपा के बाग़ी नेता इन्द्रजीत सरोज ने बसपा से अलग होकर सपा के साथ हो लिए हैं। उन्होंने अपने समर्थकों से पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की मौजूदगी में पार्टी का दामन थाम लिया है। इस दौरान उन्होंने कहा कि बसपा में बोलने की आजादी नहीं थी। यहां कम से कम बोलने और बैठने की आजादी है।

लखनऊ स्थित सपा कार्यालय में इंद्रजीत सरोज ने सपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद कहा कि बसपा में उसी तरह की अघोषित इमरजेंसी है, जैसी कि मोदी सरकार में है। मुझ पर भाजपा और कांग्रेस में जाने का दबाव था, लेकिन मैं छात्र जीवन से बसपा से जुड़ा था और वहां राष्ट्रीय महासचिव तक था। मैं झूठों की पार्टी में जाने को तैयार नहीं था।

उन्होंने कहा कि 5 वर्ष के विधानसभा कार्यकाल के दौरान उन्होंने महसूस किया कि अखिलेश प्रगतिशील विचारों के व्यक्ति हैं। योगी ने छह महीने के कार्यकाल में कुछ नहीं किया ।

इस मौके पर अखिलेश यादव ने कहा कि हमारे साथ बहुत ही पुराने नेता आए हैं। दलित और गरीबों की आवाज को सदन में पहुंचाने वाले नेता इंद्रजीत सरोज का पार्टी में स्वागत है। उन्होंने कहा कि मैं भरोसा दिलाता हूं कि यहां आप अपनी बात रख सकेंगे और इस पार्टी को अपना घर समझें। यहां लोकतंत्र है।

अखिलेश ने योगी सरकार पर हमला करते हुए कहा कि वह मथुरा की याद दिलाते हैं, लेकिन राम रहीम की बात नहीं करते। पता चला है कि हनीप्रीत यूपी के रास्ते से निकल गई और हो सकता है इस मुद्दे को दबाने के लिए कोई और मुद्दा खड़ा कर दिया जाए।

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