पंचायत चुनावों में बसपा का दिखा दम, कांग्रेस-भाजपा को झटका

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हरिद्वार। उत्तराखंड में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में निर्दलीयों के बाद बसपा ने एक बार फिर अपना दम साबित किया है और वो सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर आयी है। जबकि कांग्रेस तीसरे और बीजेपी चौथे स्थान पर रही है। हालांकि ये पहला मौका नहीं जब हरिद्वार में बसपा का जोर चला है, इससे पहले हुए चुनावों में भी हाथी अपनी धमक साबित कर चुका है। पंचायत चुनावों के नतीजों से माना जा रहा है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में भी बसपा सत्ताधारी कांग्रेस और मुख्य विपक्षी दल भाजपा के समीकरण बिगाड़ सकती है।

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अभी तक जिला पंचायत की 47 में से 43 सीटों के नतीजे सामने आए हैं. जिनमें से बसपा को 14, कांग्रेस को 11 और भाजपा को महज 2 सीटों पर जीत मिली है। वहीं 16 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत का परचम फहराया है। अभी बहादराबाद में जिला पंचायत की तीन सीटों की काउंटिंग चल रही है। हरिद्वार के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2017 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सेमी फाइनल के तौर पर माने जा रहे हैं। ऐसे में जब हरिद्वार जिले की 11 विधानसभा सीटों में से 5 पर भाजपा काबिज हो, और भाजपा के ही पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक हरिद्वार से सांसद हों, तो भाजपा के लिए ये नतीजे निश्चित तौर पर खतरे की घंटी हैं।  भले ही लोकसभा चुनाव में उत्तराखंड में लोकसभा की पांचों सीटों भाजपा की झोली गई हों, लेकिन उसके बाद से हुए पांच विधानसभा उपचुनाव में भाजपा को मात खानी पड़ी। सितारगंज, डोईवाला, सोमेश्वर, धारचूला और मानकपुर उपचुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को जोरदार पटखनी दी।

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utt-bsp-3 बसपा बन सकती है प्रमुख गेम चेंजर

चुनावी नतीजों से एक बात साफ हो गयी कि उत्तराखंड की सियासत में बसपा को  कम या हल्का आंकना अन्य दलों के लिये भारी होगा। मौजूदा समय में हरिद्वार की 11 विस सीटों में बसपा के पास भले ही 2 सीटें हैं, लेकिन पंचायत चुनावों में बसपा ने कांग्रेस और भाजपा को तगड़ी पटखनी जरूर दे दी है। नतीजे इस बात की तरफ भी इशारा कर रहे हैं कि विधानसभा चुनाव में बसपा की निर्णायक भूमिका हो सकती है।

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निर्दलीयों का साथ ले सकती है कांग्रेस !

सत्ता में आने के लिये कांग्रेस को हमेशा से निर्दलीयों का साथ मिला है। इन चुनावों में भी निर्दलीयों ने बढ़त बनायी है और सबसे ज्यादा सीटें अपने नाम की हैं। हालांकि कांग्रेस तीसरे स्थान पर है लेकिन निर्दलीयों का साथ लेकर वो जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर काबिज हो सकती है। फिलहाल चार नतीजे आना बाकी है लेकिन ये देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस निर्दलीयों का साथ लेती है या बसपा का।

  

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