यूपी लोकसभा उपचुनाव : बीजेपी के खिलाफ एक साथ आये बुआ और बबुआ, आज होगा ऐलान

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और फूलपुर चुनाव को लेकर सभी राजनैतिक पार्टियों में घमासान मचा हुआ है। ये दोनों सीटें सभी राजनैतिक दलों के लिए साख का सवाल बनी हुयी हैं। वहीँ त्रिपुरा, मेघालय और नागालैंड के परिणामों से बीजेपी और पीएम नरेंद्र मोदी के बढ़ते वर्चस्व को देखते हुए विपक्ष एक जुट होने को तैयार है। इसी कड़ी में ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती अपनी धूर विरोधी समाजवादी पार्टी को समर्थन दे सकती है।

मायावती

मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो रविवार को मायावती-अखिलेश यादव को समर्थन देने का ऐलान कर सकती हैं। इसके लिए आज इलाहाबाद और गोरखपुर में पार्टी के लोकल नेताओं की बैठक बुलाई गई है। जबकि शाम को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस समर्थन का औपचारिक एलान किया जा सकता है। फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा सीट पर ग्यारह मार्च को उपचुनाव है।

आपको बता दें कि इसके पहले सूबे में हुए लोकसभा चुनाव में बसपा खाता नहीं खोल पाई थी। वहीं विधानसभा चुनावों में बसपा को करारी मात मिली थी। जबकि समाजवादी पार्टी को भी हार का मुंह देखना पड़ा था। इस नए समीकरण को आने वाले लोकसभा चुनावों में बीजेपी के खिलाफ एक महागठबंधन को तौर पर देखा जा रहा है।

आपको बता दें कि गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटें योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफे के बाद खाली हुई हैं। दोनों नेता लोकसभा से इस्तीफा देकर उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य बन चुके हैं। गोरखपुर की सीट योगी आदित्यनाथ के लिए इसलिए जरुरी है क्योंकि इस इसपर सालों उनका अधिकार रहा है और सीएम बनने के बाद उनके लिए ये परीक्षा की भी घड़ी है। वहीँ अखिलेश यादव के लिए एक बार फिर खुद को साबित करने के लिए इन दोनों सीटो पर कब्ज़ा करना जरुरी है। बसपा भी इसी ताक में लगी है।  इसलिए माना जा रहा है कि बहुजन समाज पार्टी मुखिया मायावती अखिलेश यादव को समर्थन दे सकती है।

गोरखपुर सीट पर नजर 

1952 में पहली बार गोरखपुर लोकसभा सीट के लिए चुनाव हुआ और कांग्रेस ने जीत दर्ज की। इसके बाद गोरक्षनाथ पीठ के महंत दिग्विजयनाथ 1967 निर्दलीय चुनाव जीता। इस सीट पर 1970 में योगी आदित्यनाथ के गुरु अवैद्यनाथ ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की थी। 1971 से 1989 के बीच एक बार भारतीय लोकदल तो कांग्रेस का इस सीट पर कब्ज़ा रहा।

उसके बाद 1970 में योगी आदित्यनाथ के गुरु अवैद्यनाथ ने निर्दलीय जीत दर्ज की। 1971 से 1989 के बीच एक बार भारतीय लोकदल तो कांग्रेस का इस सीट पर कब्ज़ा रहा। 1989 के बाद से इस सीट पर गोरक्षपीठ का कब्ज़ा रहा। महंत अवैद्यनाथ 1998 तक सांसद रहे। उनके बाद 1998 से लगातार पांच बार योगी आदित्यनाथ का कब्ज़ा रहा।

योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री और केशव प्रसाद मौर्य के उप मुख्यमंत्री बनने के बाद गोरखपुर और फूलपुर में  11 मार्च को मतदान होगा। जबकि 14 मार्च को परिणाम घोषित किये जायेंगे।

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