बसपा सुप्रीमो Mayawati अब मोदी के समर्थन में, जानिए क्यों और कैसे?

बसपा प्रमुख मायावती ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट, ट्विटर के माध्यम से मांग की है की ओबीसी (OBC) समाज की अलग से जनगणना की जाए।

लखनऊ: बसपा प्रमुख मायावती (Mayawati) ती ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट, ट्विटर के माध्यम से मांग की है की ओबीसी (OBC) समाज की अलग से जनगणना की जाए। उन्होंने कहा की यह मांग बसपा (BSP) शुरू से ही करती आ रही है और अगर केंद्र सरकार कोई सकारात्मक कदम उठाती है तो हमारी पार्टी बसपा इसका खुलकर समर्थन करेगी चाहे ससंद के अंदर हो या बहार।

मंडल दिवस पर पीएम को भेजेंगे ज्ञापन

7 अगस्त को सामाजिक चेतना फाउंडेशन मंडल दिवस (Social Consciousness Foundation Mandal Day) जातीय जनगणना कराने के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित ज्ञापन प्रदेश के सभी मंडल, जिला और तहसील मुख्यालों पर सौपेंगे। फाउंडेशन के संस्थापक और न्यासी सेवानिवृत्त जस्टिस वीरेंद्र सिंह व सचिव महेंद्र कुमार ने बताया कि 2021 की आम जनगणना में ओबीसी की गणना कराने के लिए सुबह 11 बजे सभी जगह ज्ञापन सौंपा जाएगा।

ओबीसी (OBC)

अन्य पिछड़ा वर्ग ओबीसी (OBC) एक वर्ग है, यह सामान्य वर्ग यानी जनरल में ही सम्मिलित होता है पर इसमें आने वाली जातियां गरीबी और शिक्षा के रूप में पिछड़ी होती हैं यह भी सामान्य वर्ग का भाग है जो जातियां वर्गीकृत करने के लिए भारत सरकार द्वारा प्रयुक्त एक सामूहिक शब्द है। यह अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के साथ-साथ भारत की जनसंख्या के कई सरकारी वर्गीकरण में से एक है।

भारतीय संविधान में ओबीसी सामाजिक एवं शैक्षणिक पिछड़ा वर्ग (SEBC) के रूप में वर्णित किया जाता है, और भारत सरकार उनके सामाजिक और शैक्षिक विकास को सुनिश्चित करने के लिए हैं – उदाहरण के लिए, ओबीसी सार्वजनिक क्षेत्र के रोजगार और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में 27% आरक्षण के हकदार हैं। जातियों और समुदायों के सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक कारकों के आधार पर जोड़ा या हटाया जा सकता है और इनको सामाजिक न्याय और अधिकारिता भारतीय मंत्रालय द्वारा बनाए रखा ओबीसी की सूची, गतिशील है। 1985 तक, पिछड़ा वर्ग के मामलों में गृह मंत्रालय में पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के बाद देखा गया था।

अधिकारिता मंत्रालय 1985 में स्थापित

कल्याण की एक अलग मंत्रालय अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों से संबंधित मामलों के लिए भाग लेने के लिए सामाजिक एवं अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social and Empowerment) को 1985 में स्थापित किया गया था। अन्य पिछड़ा वर्गों और ओबीसी के रूप में वर्गीकृत सभी उप-जातियों के 25 फीसदी जातियां ही ओबीसी आरक्षण का 97% फायदा उठा रही हैं, जबकि कुल ओबीसी जातियों में से 37% में शून्य प्रतिनिधित्व है।

मंडल आयोग (Mandal Commission)

1 जनवरी 1979 को दूसरा पिछड़ा वर्ग आयोग स्थापित करने का निर्णय राष्ट्रपति द्वारा अधिकृत किया गया था। आयोग को लोकप्रिय मंडल आयोग के रूप में जाना जाता है, इसके अध्यक्ष बिन्देश्वरी प्रसाद मंडल ने दिसंबर 1980 में एक रिपोर्ट पेश की, जिसमें कहा गया है कि ओबीसी की जनसंख्या, जिसमें हिंदुओं और गैर हिंदुओं दोनों शामिल हैं, मंडल आयोग के अनुसार कुल आबादी का लगभग 52% है। 1979 -80 में स्थापित मंडल आयोग की प्रारंभिक सूची में पिछड़ी जातियों और समुदायों की संख्या 3, 743 थी। पिछड़ा वर्ग के राष्ट्रीय आयोग के अनुसार 2006 में ओबीसी की पिछड़ी जातियों की संख्या अब 5,013 (अधिकांश संघ राज्य क्षेत्रों के आंकड़ों के बिना) बढ़ी है।

मंडल आयोग ने ओबीसी की पहचान करने के लिए 11 संकेतक या मानदंड का विकास किया, जिनमें से चार आर्थिक थे। हालांकि, इस खोज की आलोचना की गई थी फर्जी डेटा के आधार पर। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (national sample survey) में यह आंकड़ा 32% है। भारत में ओबीसी की सही संख्या पर पर्याप्त बहस है, जिसमें जनगणना पक्षपातपूर्ण राजनीति द्वारा समझौता किया गया है। आम तौर पर इसका अनुमान लगाया जा सकता है, लेकिन मंडल आयोग या राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण द्वारा तलब के आंकड़ों की तुलना में कम।

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