Buddha Poornima 2021: भगवान गौतम बुद्ध 2565वीं जयंती पर जानें उनके जीवन की रोचक बातें

बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Poornima) के दिन भगवान गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था, इसी दिन उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी और इसी दिन उनका महानिर्वाण भी हुआ था

लखनऊ: बिहार के बोधगया (Bodh Gaya) में बौद्ध धर्मगुरु गुरुओं ने भगवान गौतम बुद्ध (Lord Gautam Buddha) की 2565वीं जयंती, बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Poornima) को सादगी के साथ मनाई है। इस पावन अवसर पर प्रयागराज (Prayagraj) के संगम तट में भी श्रद्घालुओं ने पूजा और स्नान किया है। गौतम बुद्ध का जन्म बैसाख मास की पूर्णिमा को हुआ था, इसी दिन उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी और इसी दिन उनका महानिर्वाण भी हुआ था। यह बैसाख माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है।

जानिए कैसे पड़ा सुद्धार्थ नाम

गौतम बुद्ध का जन्म 563 ईस्वी पूर्व बैसाख मास की पूर्णिमा को लुंबिनी में हुआ था जो नेपाल (Nepal) में है। उनकी माता का नाम महामाया था जो कोलीय वंश से थीं, जिनका इनके जन्म के 7 दिन बाद उनका निधन हो गया। जिसके बाद उनका पालन पोषण उनकी मौसी और शुद्दोधन की दूसरी रानी महाप्रजावती (गौतमी) ने किया। फिर उन्होंने शिशु गौतम का नाम सिद्धार्थ (Siddharth) दिया। सुद्धार्थ का मन वचपन से ही करुणा और दया का स्रोत था। इसका परिचय उनके आरंभिक जीवन की अनेक घटनाओं से पता चलता है।

सिद्धार्थ ने गुरु विश्वामित्र के पास वेद और उपनिषद्‌ को तो पढ़ा ही साथ में राजकाज और युद्ध-विद्या की भी शिक्षा ली। कुश्ती, घुड़दौड़, तीर-कमान, रथ हांकने में कोई उसकी बराबरी नहीं कर पाता। 16 वर्ष की उम्र में सिद्धार्थ का कन्या यशोधरा के साथ विवाह हुआ। पिता द्वारा ऋतुओं के अनुरूप बनाए गए वैभवशाली और समस्त भोगों से युक्त महल में वे यशोधरा के साथ रहने लगे जहां उनके पुत्र राहुल का जन्म हुआ। लेकिन विवाह के बाद उनका मन वैराग्य में चला गया। जिसके बाद सिद्धार्थ दुखों से मुक्ति दिलाने के मार्ग एवं सत्य दिव्य ज्ञान की खोज में उन्होंने अपने परिवार का त्याग कर दिया। कठोर साधना के पश्चात बोध गया (बिहार) में बोधि वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई और वे सिद्धार्थ गौतम (Siddharth Gautam) से भगवान गौतम बुद्ध बन गए।

 

गौतम बुद्ध के उपदेश

भगवान बुद्ध ने लोगों को मध्यम मार्ग का उपदेश किया। उन्होंने दुःख, उसके कारण और निवारण के लिए अष्टांगिक मार्ग सुझाया। उन्होंने अहिंसा पर बहुत जोर दिया है। उन्होंने यज्ञ और पशु-बलि की निंदा की। बुद्ध के उपदेशों का सार इस प्रकार है –

  • महात्मा बुद्ध ने सनातन धरम के कुछ संकल्पनाओं का प्रचार किया, जैसे-अग्निहोत्र तथा गायत्री मन्त्र
  • ध्यान तथा अन्तर्दृष्टि
  • मध्यमार्ग का अनुसरण
  • चार आर्य सत्य
  • अष्टांग मार्ग

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के कुशीनगर (Kushinagar) जिले में भगवान गौतम बुद्ध का एक ऐतिहासिक स्थल है जहां पर महात्मा बुद्ध का महापरिनिर्वाण हुआ था। बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Poornima) के अवसर पर कुशीनगर में एक माह का मेला लगता है। यहां पर कई देशों के अनेक सुन्दर बौद्ध मंदिर (Buddhist temple) हैं। इस कारण से यह एक अन्तरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल भी है जहाँ विश्व भर के बौद्ध तीर्थयात्री भ्रमण के लिये आते हैं।

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