2030 तक देश में 68 लाख बेटियां होंगी भ्रूड़ हत्या का शिकार, रिपोर्ट में खुलासा

हमारे जीवन का एक बड़ा हिस्सा हमारी माओं,हमारी बहनों,हमारी पत्नियों का होता है.ये सब महिलायें हैं.हमारे जीवन के सलीके से लेकर,व्यवहार के तरीकों तक पर इनका बड़ा गहरा असर होता है. पर सोचिए जरा ऐसा हो की देश में महिलायें ही न हों. माँ न हों तो हम तुम ही न हों. संस्कार दुलार और प्यार न हो.सोचो जरा बहनों के बिना दुनिया कैसी होगी. प्रेमिका या पत्नी के बिना आप का क्या होगा. पर हमारी सामाजिक प्रवृत्ति बड़ी ही आसामाजिक है.हम ज्यादा लोड नहीं लेते. हम जहमत नहीं उठाते की कभी बिना महिलाओं के अपने जीवन की कल्पना करें.लेकिन महिला विहीन दुनिया बनाने में जोर से लगे हैं. ऐसा मैं इस लिए लिख रहा हूँ क्यूंकी यह रिपोर्ट कम से कम यही कह रही है. सऊदी अरब की किंग अब्दुल्ला यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी की एक स्टडी में चौकाने वाली बात सामने आई है. 2017 से 2030 के बीच भारत में 68 लाख कम लड़कियां पैदा होंगी। जो की एक बड़ी संख्या है. और इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह है,लिंग जानने के बाद महिला के गर्भ में लड़की होने पर उनका अबॉर्शन करा दिया जाना.मतलब देश में 68 लाख लड़कियों को पेट में ही मार दिया जायेगा.

theguardian.com में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार , 2017 से 2030 के बीच उत्तर प्रदेश में पहले से 20 लाख कम लड़कियां पैदा होंगी. जिससे ये पता चलता है की लड़कियों के जन्म में सबसे ज्यादा कमी उत्तर प्रदेश में ही होने वाली है जिसकी सबसे बड़ी वजह होगी लोगों की बेटा पाने की चाहत.बेटियों को बोझ समझने और बनाने वाली सामाजिक मानसिकता. एक बड़ी वजह प्रदेश की आबादी का फर्टिलिटी रेट भी होगा.

उत्तर प्रदेश की बात है तो ये जान लेना भी जरूरी है की 2017 में प्रदेश की सरकार ने भ्रूड़ हत्या रोकने के लिए ‘मुखबिर’ योजना चलाई थी. जिसका उद्देश्य था प्रदेश भर में भ्रूड़ हत्या को रोकना ,ऐसा करने की कोशिस करने वालों की जानकारी  निकालना और उन तक पहुँच के भ्रूड़ हत्या पर लगाम लगाना. इसके लिए 181 हेल्पलाइन  का विस्तार भी किया था योगी सरकार ने. यहाँ तक सब ठीक था पर इसमें सबसे बड़ा मजाक यह है कि इस योजना की रीढ़ 181 हेल्पलाइन के ही हाल खस्ता हैं.योजना को लांच करते समय 181 हेल्पलाइन और उससे जुड़ी एंबूलेंस सर्विस को इस योजना की ताकत के रूप में पेश किया गया था.अब यह हेल्पलाइन बंद कर दी गई. इसमें काम करने वाले कर्मचारियों का सालों से वेतन रूका  हुआ है. अब नौकरी भी गई और वेतन तमाम प्रदर्शनों के बाद भी नहीं मिल रहा. भ्रूड़ हत्या कैसे रूकेगी राम ही जानें.एक तो हमारा सामाजिक उत्थान इतना ज्यादा हो चुका है की पूछो मत. ऊपर से सरकारी योजनाओं का खोखलापन जले पर नमक छिड़कने जैसा है. ऐसा भी नहीं है की इसमें सिर्फ उत्तर प्रदेश ही है. “इस कमी में सबका अपराध है शामिल,किसी एक का गुनाह थोड़ी है”.  भारत के उत्तरी हिस्से में स्थित 17 राज्यों में पाया गया कि बेटे की चाहत काफी अधिक है.वैसे यह बात किसी स्टडी की मोहताज नहीं रही,हमेसा से जग जाहीर थी.लेकिन इस स्टडी में भी यही बात सामने आयी.

181 महिला हेल्पलाइन की कर्मचारियों ने वेतन न मिलने पर किया प्रदर्शन ,जीवीके कंपनी पर लगाये गंभीर आरोप

ये रिपोर्ट इसी हफ्ते Plos One जर्नल में प्रकाशित की गई है. स्टडी में इस बात का भी सुझाव दिया गया है की भारत जैसे देश में लैंगिक समानता के लिए सख्त कायदे कानूनों की आवश्यकता है.

यह जानना भी जरूरी है कि 1994 में ही भारत में कानून बनाकर गर्भ में पल रहे बच्चे का लिंग जांच करना अवैध करार दिया गया था.जिसका उद्देश्य था भ्रूड़ हत्या रोकना. लेकिन पूरे देश में यह कानून समान रूप से लागू नहीं हो सका.आज  भी देश में लैंगिक अनुपात का बिगड़ना लगातार जारी है. देश में वर्तमान में प्रति 1000 पुरुष पर 900 से 930 महिलायें हैं. मतलब अगर स्टडी सही कह रही है तो परिस्थितियाँ अच्छी होती नहीं दिख रही हैं.

Related Articles