गुजरात को खुले में शौच मुक्त घोषित करने पर CAG ने उठाये सवाल, बताई क्या है सच्चाई

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गांधीनगर: गुजरात को खुले में शौच मुक्त घोषित करने के सरकार के दावों पर कैग ने कहा कि यह दावा गलत लग रहा है क्योंकि कई ग्रामीणों के घरों में अब भी शौचालय नहीं बने हैं।

बुधवार को कैग ने राज्य विधानसभा में एक रिपोर्ट पेश की जिसमें इस बात का खुलासा किया गया कि आठ जिलों में किए गए सर्वेक्षण में करीब 30 फीसदी घरों में शौचालय नहीं पाए गए। बता दें कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत गुजरात समेत 11 राज्यों को खुले में शौच मुक्त घोषित किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक राज्य सरकार ने दो अक्तूबर 2017 तक गुजरात के सभी जिलों को खुले में शौच मुक्त घोषित कर दिया। लेकिन 2014-17 तक आठ जिला पंचायतों के तहत 120 ग्राम पंचायतों की जांच में ये बात सामन आई है कि 29 फीसदी घरों में अब भी शौचालय नहीं हैं। इसमें बताया गया कि राज्य सरकार का यह दावा गलत प्रातीत होता है कि गुजरात के सभी जिले खुले में शौच से मुक्त हो गए हैं।

बता दें यह रिपोर्ट दाहोद, बनासकांठा, छोटा उदयपुर, डांग, पाटण, वलसाड़, जामनगर और जूनागढ़ से तैयार की गयी। कैग ने कहा कि लोग अब भी विभिन्न कारणों से शौचालयों का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं।

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रिपोर्ट में बताया कि जिन 120 गांवों की जांच की उनमें से 41 में स्वच्छ भारत अभियान के तहत बनाए गए शौचालयों का इस्तेमाल नहीं किया जा सका क्योंकि वहां पानी की सही मात्रा में उपलब्ध नहीं है।

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