पंचांग 11 अगस्त 2018: जानिए आज का शुभाशुभ मुहूर्त और राहुकाल!

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11 अगस्त 2018, दिन शनिवार साल का आखिरी सूर्य ग्रहण पड़ रहा है। हिन्दू पंचांग के अनुसार आज का दिन कैसा रहेगा, राहुकाल कब पड़ेगा और तिथि विशेष क्या है? जानिए आज के पंचांग में…

*पंचांग शनिवार, 11 अगस्त 2018*

सूर्योदय: ०५:५२
सूर्यास्त: ०७:०१
चन्द्रोदय:
चन्द्रास्त: १९:१०
अयन दक्षिणायन (उत्तरगोले)
ऋतु: वर्षा
शक सम्वत: १९४० (विलम्बी)
विक्रम सम्वत: २०७५ (विरोधकृत)
युगाब्द: ५१२०
मास: श्रावण
पक्ष: कृष्ण
तिथि: अमावस्या (१५:२८ तक)
नक्षत्र: अश्लेशा (२४:०७ तक)
योग: व्यतीपात (११:४५ तक)
प्रथम करण: नाग
द्वितीय करण: किंस्तुघ्न                                                    राहुकाल: प्रातः 9 बजे से 10 बजकर 30 मिनट तक।

*गोचर ग्रह*

सूर्य- कर्क
चंद्र- सिंह (२४:०५ से)
मंगल- मकर
बुध- कर्क
गुरु- तुला
शुक्र- कन्या
शनि- धनु
राहु- कर्क
केतु- मकर

*शुभाशुभ मुहूर्त विचार*

अभिजित मुहूर्त: ११:५५ – १२:४८
अमृत काल: २२:४१ – २४:०७
होमाहुति: सूर्य
अग्निवास: पाताल
दिशा शूल: पूर्व
नक्षत्र शूल:
चन्द्र वास: उत्तर (पूर्व २४:०६ से)
दुर्मुहूर्त: ०५:४५ – ०६:३८
राहुकाल: ०९:०३ – १०:४२
राहु काल वास: पूर्व
यमगण्ड: १४:०० – १५:४०

*उदय-लग्न मुहूर्त*

०५:४५ – ०६:११ कर्क
०६:११ – ०८:३० सिंह
०८:३० – १०:४८ कन्या
१०:४८ – १३:०९ तुला
१३:०९ – १५:२८ वृश्चिक
१५:२८ – १७:३२ धनु
१७:३२ – १९:१३ मकर
१९:१३ – २०:३९ कुम्भ
२०:३९ – २२:०३ मीन
२२:०३ – २३:३६ मेष
२३:३६ – २५:३१ वृषभ
२५:३१ – २७:४६ मिथुन
२७:४६ – २९:४६ कर्क

*चौघड़िया विचार*

॥ दिन का चौघड़िया ॥
१ – काल २ – शुभ
३ – रोग ४ – उद्वेग
५ – चर ६ – लाभ
७ – अमृत ८ – काल
॥ रात्रि का चौघड़िया ॥
१ – लाभ २ – उद्वेग
३ – शुभ ४ – अमृत
५ – चर ६ – रोग
७ – काल ८ – लाभ
नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।

*शुभ यात्रा दिशा*

उत्तर-पूर्व (वाय विन्डिंग अथवा तिल मिश्रित चावल का सेवन कर यात्रा करें)

*तिथि विशेष*

देवपितृ कार्ये शनैश्चरी हरियाली अमावस्या आदि।

*आज जन्मे शिशुओं का नामकरण*

आज रात्रि २४:०७ तक जन्मे शिशुओ का नाम आश्लेषा प्रथम, द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ चरण अनुसार क्रमशः (डी, डू, डे, डो) तथा इसके बाद जन्मे शिशुओं का नाम मघा प्रथम चरण अनुसार (मा) नामाक्षर से रखना शास्त्र सम्मत है।

आश्लेषा एवं मघा के चारो चरण गंडमूल के अंतर्गत आते है आश्लेषा के प्रथम पद में जन्म होने से यदि शांति करायीं जाये तो शुभ फल, द्वितीय पद में संपत्ति के लिए अशुभ, तृतीय पद में माता को हानि तथा चतुर्थ पद में पिता को हानि, मघा के प्रथम पद में जन्म होने से माता को हानि होती है। जन्म से २७ वे जन्म नक्षत्र के दिन नक्षत्र शांति करना शास्त्र सम्मत है।

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