पंचांग 13 अगस्त 2018: जानिए आज का शुभाशुभ मुहूर्त और राहुकाल!

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13 अगस्त 2018, दिन सोमवार को हिन्दू पंचांग के अनुसार कौन सा शुभ योग बन रहा है? राहुकाल कब पड़ेगा और तिथि विशेष क्या है? जानिए आज के पंचांग में…

*पंचांग सोमवार, 13 अगस्त 2018*

सूर्योदय: ०५:५३
सूर्यास्त: ०६:५९
चन्द्रोदय: ०७:३३
चन्द्रास्त:२०:४०
अयन दक्षिणायन (उत्तरगोले)
ऋतु: वर्षा
शक सम्वत: १९४० (विलम्बी)
विक्रम सम्वत: २०७५ (विरोधकृत)
युगाब्द: ५१२०
मास: श्रावण
पक्ष: शुक्ल
तिथि: द्वितीया (०८:३६ तक)
क्षय तिथि: तृतीया (२९:४७ तक)
नक्षत्र: पूर्वाफाल्गुनी (१९:११ तक)
योग: शिव (२४:२४ तक)
प्रथम करण: कौलव
द्वितीय करण: तैतिल
क्षय करण: गर

*गोचर ग्रह*

सूर्य- कर्क
चंद्र- कन्या (२४:३० से)
मंगल- मकर
बुध- कर्क
गुरु- तुला
शुक्र- कन्या
शनि- धनु
राहु- कर्क
केतु- मकर

*शुभाशुभ मुहूर्त विचार*

अभिजित मुहूर्त: ११:५५ – १२:४७
अमृत काल: १३:२२ – १४:४९
होमाहुति: सूर्य
अग्निवास: आकाश ०८:३६ से पाताल, २९:४७ से पृथ्वी
दिशा शूल: पूर्व
नक्षत्र शूल: उत्तर (१९:११ से)
चन्द्र वास: पूर्व (दक्षिण २४:४१ से)
दुर्मुहूर्त: १२:४७ – १३:४०
राहुकाल: ०७:२५ – ०९:०४
राहु काल वास: उत्तर-पश्चिम
यमगण्ड: १०:४२ – १२:२१

*उदय-लग्न मुहूर्त*

०५:४६ – ०६:०४ कर्क
०६:०४ – ०८:२२ सिंह
०८:२२ – १०:४० कन्या
१०:४० – १३:०१ तुला
१३:०१ – १५:२१ वृश्चिक
१५:२१ – १७:२४ धनु
१७:२४ – १९:०५ मकर
१९:०५ – २०:३१ कुम्भ
२०:३१ – २१:५५ मीन
२१:५५ – २३:२८ मेष
२३:२८ – २५:२३ वृषभ
२५:२३ – २७:३८ मिथुन
२७:३८ – २९:४७ कर्क

*चौघड़िया विचार*

॥ दिन का चौघड़िया ॥
१ – अमृत २ – काल
३ – शुभ ४ – रोग
५ – उद्वेग ६ – चर
७ – लाभ ८ – अमृत
॥ रात्रि का चौघड़िया ॥
१ – चर २ – रोग
३ – काल ४ – लाभ
५ – उद्वेग ६ – शुभ
७ – अमृत ८ – चर
नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।

*शुभ यात्रा दिशा*

दक्षिण-पूर्व (दर्पण देखकर अथवा खीर का सेवन कर यात्रा करें)

*तिथि विशेष*

मधुश्रवातीज (हरियाली तीज), तृतीया तिथि क्षय, वाहनादि क्रय मुहूर्त सिंह+कन्या लग्न+अभिजीत योग में आदि।

*आज जन्मे शिशुओं का नामकरण*

आज रात्रि १९:११ तक जन्मे शिशुओ का नाम पूर्वाफाल्गुनी द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ चरण अनुसार क्रमशः (टा, टी, टू) तथा इसके बाद जन्मे शिशुओं का नाम उत्तराफाल्गुनी प्रथम, द्वितीय चरण अनुसार (टे, टो) नामाक्षर से रखना शास्त्र सम्मत है।

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