पंचांग 23 जुलाई 2018: जानिए सोमवार का शुभ मुहूर्त, राहुकाल और चौघड़िया!

पंचांग और हिंदी कैलेंडर के अनुसार 23 जुलाई 2018 दिन सोमवार का तिथि विशेष और शुभ चौघड़िया, शुभ मुहूर्त और शुभ बेला में कार्य करना हर एक प्रकार से शुभ होता है। अगर आप शुभ कार्य करने जा रहे हैं तो ये ध्यान रखें की आज का शुभ समय किस समय पड़ा रहा है। साथ ही राहुकाल जानकर ही कार्य करें…

* पंचांग सोमवार, २३ जुलाई २०१८*

सूर्योदय: ०५:४१
सूर्यास्त: ०७:१४
चन्द्रोदय: १५:४१
चन्द्रास्त: २६:३३
अयन दक्षिणायन (उत्तरगोले)
ऋतु: वर्षा
शक सम्वत: १९४० (विलम्बी)
विक्रम सम्वत: २०७५ (विरोधकृत)
युगाब्द: १५१२०
मास: आषाढ़
पक्ष: शुक्ल
तिथि: एकादशी (१६:२३ तक)
नक्षत्र: अनुराधा (१२:५५ तक)
योग: शुक्ल (०७:२९ तक)
प्रथम करण: विष्टि
द्वितीय करण: बव

* गोचर ग्रह *

सूर्य- कर्क
चंद्र- वृश्चिक
मंगल- मकर
बुध- कर्क
गुरु- तुला
शुक्र- सिंह
शनि- धनु
राहु- कर्क
केतु- मकर

*शुभाशुभ मुहूर्त विचार*

अभिजित मुहूर्त: ११:५५ – १२:५०
अमृत काल:
होमाहुति: शनि
अग्निवास: पाताल (१६:२५ से पृथ्वी)
भद्रावास: स्वर्ग (१६:२३ तक)
दिशा शूल: पूर्व
नक्षत्र शूल: पूर्व (१२:५४ से)
चन्द्र वास: उत्तर
दुर्मुहूर्त: १२:५० – १३:४४
राहुकाल: ०७:१६ – ०८:५८
राहु काल वास: उत्तर-पश्चिम
यमगण्ड: १०:४० – १२:२३

*उदय-लग्न मुहूर्त*

०५:३४ – ०७:२६ कर्क
०७:२६ – ०९:४५ सिंह
०९:४५ – १२:०३ कन्या
१२:०३ – १४:२४ तुला
१४:२४ – १६:४३ वृश्चिक
१६:४३ – १८:४७ धनु
१८:४७ – २०:२८ मकर
२०:२८ – २१:५४ कुम्भ
२१:५४ – २३:१७ मीन
२३:१७ – २४:५१ मेष
२४:५१ – २६:४६ वृषभ
२६:४६ – २९:०१ मिथुन
२९:०१ – २९:३४ कर्क

*चौघड़िया विचार*

॥ दिन का चौघड़िया ॥
१ – अमृत २ – काल
३ – शुभ ४ – रोग
५ – उद्वेग ६ – चर
७ – लाभ ८ – अमृत
॥रात्रि का चौघड़िया॥
१ – चर २ – रोग
३ – काल ४ – लाभ
५ – उद्वेग ६ – शुभ
७ – अमृत ८ – चर
नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।

*शुभ यात्रा दिशा*

उत्तर-पश्चिम (दर्पण देखकर अथवा खीर का सेवन कर यात्रा करें)

*तिथि विशेष*

भद्रा १६:२३ तक, सर्वार्थसिद्धि योग प्रातः ०६:०२ से १२:५२ तक, देवशयनी एकादशी सभी के लिये, चातुर्मास विधान आरंभ आदि।

*आज जन्मे शिशुओं का नामकरण*

आज १२:५५ तक जन्मे शिशुओं का नाम अनुराधा चतुर्थ चरण के अनुसार क्रमशः (ने) तथा इसके बाद जन्मे शिशुओं का नाम ज्येष्ठा प्रथम, द्वितीय, तृतीय चरण के अनुसार क्रमशः (नो, या, यी) नामाक्षर से रखना शास्त्र सम्मत है।

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