पंचांग 29 अगस्त 2018: जानिए आज का शुभाशुभ मुहूर्त और राहुकाल!

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हिन्दू पंचांग के अनुसार बुधवार का दिन कैसा रहेगा। कौन सा शुभ योग बन रहा है और क्या है राहुकाल। तिथि विशेष और शुभाशुभ मुहूर्त क्या है, जानिए आज के पंचांग में…

*पञ्चाङ्ग, बुधवार, २९ अगस्त २०१८*
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सूर्योदय: ०६:०१
सूर्यास्त: ०६:४२
चन्द्रोदय: २०:३५
चन्द्रास्त: ०८:०९
अयन दक्षिणायन (उत्तरगोले)
ऋतु: शरद
शक सम्वत: १९४० (विलम्बी)
विक्रम सम्वत: २०७५ (विरोधकृत)
युगाब्द: ५१२०
मास: भाद्रपद
पक्ष: कृष्ण
तिथि: तृतीया (२१:३८ तक)
नक्षत्र: उत्तराभाद्रपद (१८:४८ तक)
योग: शूल (२१:०७ तक)
प्रथम करण: वणिज
द्वितीय करण: विष्टि

*गोचर ग्रह*
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सूर्य सिंह
चंद्र मीन
मंगल मकर
बुध कर्क (मार्गी)
गुरु तुला
शुक्र कन्या
शनि धनु
राहु कर्क
केतु मकर

*उदय-लग्न मुहूर्त*
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०५:५५ – ०७:२० सिंह
०७:२० – ०९:३७ कन्या
०९:३७ – ११:५८ तुला
११:५८ – १४:१८ वृश्चिक
१४:१८ – १६:२१ धनु
१६:२१ – १८:०२ मकर
१८:०२ – १९:२८ कुम्भ
१९:२८ – २०:५२ मीन
२०:५२ – २२:२६ मेष
२२:२६ – २४:२० वृषभ
२४:२० – २६:३५ मिथुन
२६:३५ – २८:५७ कर्क
२८:५७ – २९:५६ सिंह

*अभिजित मुहूर्त*
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अमृत काल: १३:४० – १५:२३
होमाहुति: मंगल
अग्निवास: पृथ्वी
भद्रावास: मृत्यु (०९:१२ से २१:३८)
दिशा शूल: उत्तर
नक्षत्र शूल:
चन्द्र वास: उत्तर
दुर्मुहूर्त: ११:५२ – १२:४३
राहुकाल: १२:१७ – १३:५३
राहु काल वास: दक्षिण-पश्चिम
यमगण्ड: ०७:३१ – ०९:०६

*चौघड़िया विचार*
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॥दिन का चौघड़िया॥
१ – लाभ २ – अमृत
३ – काल ४ – शुभ
५ – रोग ६ – उद्वेग
७ – चर ८ – लाभ
॥रात्रि का चौघड़िया॥
१ – उद्वेग २ – शुभ
३ – अमृत ४ – चर
५ – रोग ६ – काल
७ – लाभ ८ – उद्वेग
नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।

*शुभ यात्रा दिशा*
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दक्षिण-पश्चिम (गुड़ अथवा दूध का सेवन कर यात्रा करें)

*तिथि विशेष*
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भद्रा प्रातः ०९:०८ से २१:३८ तक, कज्जली (सातुड़ी) तीज व्रत, दुकान व्यवसाय आरंभ मुहूर्त प्रातः ०९:१० तक आदि।

*आज जन्मे शिशुओं का नामकरण*
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आज १८:४८ तक जन्मे शिशुओ का नाम उत्तराभाद्रपद तृतीय, चतुर्थ चरण अनुसार (झ, ञ) तथा इसके बाद जन्मे शिशुओं का नाम रेवती प्रथम, द्वितीय, तृतीय चरण अनुसार क्रमशः (दे, दो, च) नामाक्षर से रखना शास्त्र सम्मत है>

रेवती के चारो चरण गंडमूल के अंतर्गत आते है इसके प्रथम पद में जन्म होने से राज सम्मान, द्वितीय पद में मंत्री पद तथा
तृतीय पद में धन सुख की प्राप्ति होती है।

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