पंचांग 3 अगस्त 2018: जानिए आज का शुभाशुभ मुहूर्त और राहुकाल!

3 अगस्त 2018, दिन शुक्रवार को हिन्दू पंचांग के अनुसार कौन सा शुभ योग बन रहा है? राहुकाल कब पड़ेगा और तिथि विशेष क्या है? जानिए आज के पंचांग में…

* पंचांग शुक्रवार, 3 अगस्त 2018*

सूर्योदय: ०५:४७
सूर्यास्त: ०७:०७
चन्द्रोदय: २३:०८
चन्द्रास्त: ११:०९
अयन दक्षिणायन (उत्तरगोले)
ऋतु: वर्षा
शक सम्वत: १९४० (विलम्बी)
विक्रम सम्वत: २०७५ (विरोधकृत)
युगाब्द ५१२०
मास: श्रावण
पक्ष: कृष्ण
तिथि: षष्ठी (१२:०८ तक)
नक्षत्र: रेवती (१४:२५ तक)
योग: धृति (१४:०५ तक)
प्रथम करण: वणिज
द्वितीय करण: विष्टि

*गोचर ग्रह*

सूर्य- कर्क
चंद्र- मेष (१४:२५ से)
मंगल- मकर
बुध- कर्क
गुरु- तुला
शुक्र- कन्या
शनि- धनु
राहु- कर्क
केतु- मकर

*शुभाशुभ मुहूर्त विचार*

अभिजित मुहूर्त: ११:५६ – १२:४९
अमृत काल: ११:५४ – १३:३५
होमाहुति: गुरु
अग्निवास: पृथ्वी (१२:०८ तक)
दिशा शूल: पश्चिम
नक्षत्र शूल:
चन्द्र वास: उत्तर (पूर्व १४:२५ से)
दुर्मुहूर्त:
०८:२१ – ०९:१५
राहुकाल: १०:४२ – १२:२२
राहु काल वास: दक्षिण-पूर्व
यमगण्ड: १५:४३ – १७:२४

*उदय-लग्न मुहूर्त*

०५:४० – ०६:४३ कर्क
०६:४३ – ०९:०२ सिंह
०९:०२ – ११:२० कन्या
११:२० – १३:४१ तुला
१३:४१ – १६:०० वृश्चिक
१६:०० – १८:०४ धनु
१८:०४ – १९:४५ मकर
१९:४५ – २१:११ कुम्भ
२१:११ – २२:३४ मीन
२२:३४ – २४:०८ मेष
२४:०८ – २६:०३ वृषभ
२६:०३ – २८:१७ मिथुन
२८:१७ – २९:४१ कर्क

*चौघड़िया विचार*

॥ दिन का चौघड़िया ॥
१ – चर २ – लाभ
३ – अमृत ४ – काल
५ – शुभ ६ – रोग
७ – उद्वेग ८ – चर
॥ रात्रि का चौघड़िया ॥
१ – रोग २ – काल
३ – लाभ ४ – उद्वेग
५ – शुभ ६ – अमृत
७ – चर ८ – रोग
नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।

*शुभ यात्रा दिशा*

उत्तर-पूर्व (राई अथवा दही लस्सी का सेवन कर यात्रा करें)।

*तिथि विशेष*

भद्रावास: मृत्युलोक १२:०८ से १४:२५ तक, स्वर्गलोक १४:२५ से २४:११ तक, पंचक समाप्ति १४:२५ पर, अमृतसिद्धि योग ०६:०८ से १४:२४ तक, सर्वार्थसिद्धि योग सूर्योदय से १४:२४ तक, वाहनादि क्रय मुहूर्त दिन ०२:०४ तक, व्यवसाय आरंभ मुहूर्त सायं ०७:०९ तक, नींव एवं गृहारम्भ मुहूर्त ०९:१४ तक आदि।

*आज जन्मे शिशुओं का नामकरण*

आज प्रातः १४:२४ तक जन्मे शिशुओ का नाम रेवती तृतीय, चतुर्थ चरण अनुसार क्रमशः (च, ची) तथा इसके बाद जन्मे शिशुओं का नाम अश्विनी प्रथम, द्वितीय, तृतीय चरण अनुसार क्रमशः (चू, चे, चो) नामाक्षर से रखना शास्त्र सम्मत है।

रेवती एवं अश्विनी के चारो चरण गंडमूल के अंतर्गत आते है इसके तृतीय पद जन्म होने से धन सुख तथा चतुर्थ पद में – स्वयं को कष्ट तथा अश्विनी के प्रथम पद में पिता के लिए कष्टकारी, द्वितीय पद में – आराम तथा सुख के लिए उत्तम एवं तृतीय पद में – उच्च पद मिलता है।

जन्म से २७ वे जन्म नक्षत्र के दिन नक्षत्र शांति कराना शास्त्रोक्त अनुकूल है।

 

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