पंचांग 25 अगस्त 2018: जानिए शनिवार का शुभाशुभ मुहूर्त और राहुकाल!

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25 अगस्त 2018, दिन शनिवार को पंचांग के अनुसार कौन सा शुभ योग बन रहा है। शुभाशुभ मुहूर्त क्या है और कब पड़ रहा है राहुकाल, जानिए आज के पंचांग में…

* पञ्चाङ्ग, शनिवार, २५ अगस्त २०१८*

सूर्योदय: ०५:५९
सूर्यास्त: ०६:४७
चन्द्रोदय: १८:१७
चन्द्रास्त: २९:२७
अयन दक्षिणायन (उत्तरगोले)
ऋतु: शरद
शक सम्वत: १९४० (विलम्बी)
विक्रम सम्वत: २०७५ (विरोधकृत)
युगाब्द : ५१२०
मास : श्रावण
पक्ष: शुक्ल
तिथि: चतुर्दशी (१५:१६ तक)
नक्षत्र: श्रवण (०९:४९ तक)
योग: शोभन (२०:०७ तक)
प्रथम करण: वणिज
द्वितीय करण: विष्टि

*गोचर ग्रह*

सूर्य सिंह
चंद्र कुम्भ (२३:१४ से)
मंगल मकर
बुध कर्क (मार्गी)
गुरु तुला
शुक्र कन्या
शनि धनु
राहु कर्क
केतु मकर

*उदय-लग्न मुहूर्त*

०५:५३ – ०७:३५ सिंह
०७:३५ – ०९:५३ कन्या
०९:५३ – १२:१४ तुला
१२:१४ – १४:३३ वृश्चिक
१४:३३ – १६:३७ धनु
१६:३७ – १८:१८ मकर
१८:१८ – १९:४४ कुम्भ
१९:४४ – २१:०७ मीन
२१:०७ – २२:४१ मेष
२२:४१ – २४:३६ वृषभ
२४:३६ – २६:५१ मिथुन
२६:५१ – २९:१३ कर्क
२९:१३ – २९:५४ सिंह

*शुभाशुभ मुहूर्त विचार*

अभिजित मुहूर्त: ११:५३ – १२:४४
अमृत काल: २५:०१ – २६:४९
होमाहुति: चन्द्र
अग्निवास: पाताल (१५:१६ से पृथ्वी)
भद्रावास: पाताल (१५:१६ से २३:१५
मृत्यु लोक (२३:१७ से २८:२५)
दिशा शूल: पूर्व में
नक्षत्र शूल:
चन्द्र वास: दक्षिण पश्चिम (२३:१५ से)
दुर्मुहूर्त: ०५:५३ – ०६:४४
राहुकाल: ०९:०६ – १०:४२
राहु काल वास: पूर्व
यमगण्ड: १३:५५ – १५:३१

*चौघड़िया विचार*

॥दिन का चौघड़िया॥
१ – काल २ – शुभ
३ – रोग ४ – उद्वेग
५ – चर ६ – लाभ
७ – अमृत ८ – काल
॥रात्रि का चौघड़िया॥
१ – लाभ २ – उद्वेग
३ – शुभ ४ – अमृत
५ – चर ६ – रोग
७ – काल ८ – लाभ
नोट- दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।

*शुभ यात्रा दिशा*

दक्षिण-पश्चिम (वाय विन्डिंग अथवा टिल मिश्रित चावल का सेवन कर यात्रा करें)

*तिथि विशेष*

भद्रावास: पाताल (१५:१६ से २३:१५, मृत्यु लोक (२३:१७ से २८:२५), पंचक आरम्भ २३:१४ से, श्री सत्यनारायण व्रत, ऋग्वेदीय उपाकर्म (उपनयन संस्कार एवं सालभर किये कृत्यों का प्रायश्चित) आदि।

*आज जन्मे शिशुओं का नामकरण*

आज ०९:४९ तक जन्मे शिशुओ का नाम, श्रवण चतुर्थ चरण अनुसार (खो) तथा इसके बाद जन्मे शिशुओं का नाम धनिष्ठा प्रथम, द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ चरण अनुसार क्रमशः (ग, गी, गू, गे) नामाक्षर से रखना शास्त्र सम्मत है।

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