पंचांग 30 अगस्त 2018: जानिए गुरुवार का शुभाशुभ मुहूर्त और राहुकाल

0

हिन्दू पंचांग के अनुसार गुरुवार का दिन कैसा रहेगा। कौन सा शुभ योग बन रहा है और क्या है राहुकाल। तिथि विशेष और शुभाशुभ मुहूर्त क्या है, जानिए आज के पंचांग में…

* पञ्चाङ्ग, गुरुवार ३० अगस्त २०१८*
========================

सूर्योदय: ०६:०२
सूर्यास्त: ०६:४१
चन्द्रोदय: २१:०९
चन्द्रास्त: ०९:०४
अयन दक्षिणायन (उत्तरगोले)
ऋतु: शरद
शक सम्वत: १९४० (विलम्बी)
विक्रम सम्वत: २०७५ (विरोधकृत)
युगाब्द: ५१२०
मास: भाद्रपद
पक्ष: कृष्ण
तिथि: चतुर्थी (२२:०९ तक)
नक्षत्र: रेवती (२०:०१ तक)
योग: गण्ड (२०:३१ तक)
प्रथम करण: बव
द्वितीय करण: बालव

*गोचर ग्रह*
========

सूर्य सिंह
चंद्र मेष (२१:१५ से)
मंगल मकर
बुध कर्क (मार्गी)
गुरु तुला
शुक्र कन्या
शनि धनु
राहु कर्क
केतु मकर

*शुभाशुभ मुहूर्त विचार*
================

अभिजित मुहूर्त: ११:५१ – १२:४२
अमृत काल: १७:३० – १९:११
होमाहुति: मंगल
अग्निवास: आकाश
दिशा शूल: दक्षिण
नक्षत्र शूल:
चन्द्र वास: उत्तर (पूर्व २०:०१ से)
दुर्मुहूर्त: १०:१० – ११:०१
राहुकाल: १३:५२ – १५:२७
राहु काल वास: दक्षिण
यमगण्ड: ०५:५६ – ०७:३१

*उदय-लग्न मुहूर्त*
============

०५:५६ – ०७:१६ सिंह
०७:१६ – ०९:३४ कन्या
०९:३४ – ११:५४ तुला
११:५४ – १४:१४ वृश्चिक
१४:१४ – १६:१७ धनु
१६:१७ – १७:५९ मकर
१७:५९ – १९:२४ कुम्भ
१९:२४ – २०:४८ मीन
२०:४८ – २२:२२ मेष
२२:२२ – २४:१६ वृषभ
२४:१६ – २६:३१ मिथुन
२६:३१ – २८:५३ कर्क
२८:५३ – २९:५६ सिंह

*चौघड़िया विचार*
=============

॥दिन का चौघड़िया॥
१ – शुभ २ – रोग
३ – उद्वेग ४ – चर
५ – लाभ ६ – अमृत
७ – काल ८ – शुभ
॥रात्रि का चौघड़िया॥
१ – अमृत २ – चर
३ – रोग ४ – काल
५ – लाभ ६ – उद्वेग
७ – शुभ ८ – अमृत
नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।

*शुभ यात्रा दिशा*
============

उत्तर-पूर्व (दही का सेवन कर यात्रा करें)

*तिथि विशेष*
=========

पंचक समाप्त २०:०१ पर, बहुला चतुर्थी व्रत, सर्वार्थसिद्धि योग ०६:२१ से अगले सूर्योदय तक आदि।

*आज जन्मे शिशुओं का नामकरण*
========================

आज २०:०१ तक जन्मे शिशुओ का नाम रेवती तृतीय, चतुर्थ चरण अनुसार (च, ची) तथा इसके बाद जन्मे शिशुओं का नाम अश्विनी प्रथम, द्वितीय चरण अनुसार क्रमशः (चू, चे) नामाक्षर से रखना शास्त्र सम्मत है

रेवती एवं अश्विनी के चारो चरण गंडमूल के अंतर्गत आते है रेवती के तृतीय पद में जन्म होने से धन सुख की प्राप्ति, चतुर्थ पद में स्वयं को कष्ट तथा अश्विनी के प्रथम पद में पिता के लिए कष्टकारी, द्वितीय पद में आराम तथा सुख केलिए उत्तम फलकारक है। जन्म से २७ वे जन्म नक्षत्र के दिन नक्षत्र शांति करना शास्त्र सम्मत है।

loading...
शेयर करें