सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश, दो बालिगों की शादी में खाप पंचायतों का दखल गैरकानूनी

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि शादी के लिए सहमत दो बालिगों के बीच विवाह के मामले में खाप पंचायतों का किसी भी तरह का दखल अवैध है और इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि ‘ऑनर किलिंग’ के सारे मामलों का निपटारा विशेष/त्वरित अदालतों के जरिए होना चाहिए। कोर्ट ने कहा, ऑनर किलिंग अवैध है और इसे एक पल भी अस्तित्व में रहने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

दो बालिगों के बीच विवाह

असहिष्णु समूह जो श्रेष्ठ वर्ग या श्रेष्ठ नस्ल की भावना रखते हैं

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, असहिष्णु समूह जो श्रेष्ठ वर्ग या श्रेष्ठ नस्ल की भावना रखते हैं, वे किसी प्रकार के दर्शन, नैतिक, सामाजिक या स्वघोषित दावों के जरिए लोगों को उनके अधिकार से वंचित नहीं कर सकते। ऑनर किलिंग को व्यक्तिगत स्वतंत्रता, पसंद के अधिकार और किसी के पसंद के अपनी अनुभूति को समाप्त करने वाला बताते हुए अदालत ने कहा, यह पूरी तरह से ध्यान में रखा जाना चाहिए कि जब दो वयस्क सहमति से एक-दूसरे को जीवनसाथी चुनते हैं, तो यह उनके चुनने की अभिव्यक्ति है, जिसे संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत पहचान दी गई है।

कोर्ट ने कहा कि यह निर्देश लंबित मामलों पर भी लागू होगा

अदालत ने साथ में यह भी निर्देश दिया कि ऑनर किलिंग से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई इस मामले के लिए अधिकृत विशेष अदालतों या त्वरित अदालतों में होनी चाहिए। अदालत ने कहा, इसके साथ ही मामले की सुनवाई रोजाना आधार पर होनी चाहिए और अपराध के बारे में संज्ञान लेने के छह माह के भीतर इसका निपटारा हो जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि यह निर्देश लंबित मामलों पर भी लागू होगा। यह ऐतिहासिक फैसला एक एनजीओ शक्ति वाहिनी की याचिका पर आया है।

क्या होती है खाप पंचायत?

खाप लोगों का समूह होता है। एक गोत्र या जाति के लोग मिलकर एक खाप-पंचायत बनाते हैं, जो पांच या उससे ज्यादा गांवों की होती है। इन्हें कानूनी मान्यता नहीं है। इसके बावजूद गांव में किसी तरह की घटना के बाद खाप कानून से ऊपर उठ कर फैसला करती हैं। खाप पंचायतें देश के कुछ राज्यों के गांवों में काफी लंबे वक्त से काम करती रही हैं। हालांकि, इनमें हरियाणा की खाप पंचायतें कुछ अलग पहचान रखती हैं। कहा जाता है कि खाप की शुरुआत की हरियाणा से ही हुई थी। उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भी खाप पंचायतें विवादित फैसले करती रही हैं।

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