उत्तर प्रदेश में कैंसर बांट रहे इन ठिकानों पर लगेंगे ताले

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up-1_647_122115091218देश की राष्ट्रीय राजधानी से मात्र 30 किमी की दूरी पर उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के छपरौला औद्योगिक क्षेत्र में कई उद्योग जो कैंसर स्पाट बन गये थे अब उन पर ताले लगेंगे। ऐसा इसलिए होने जा रहा है क्योंकि ये उद्योग वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के मानकों के हिसाब से खतरनाक श्रेणी (रेड कैटेगरी) में आ गये हैं। इनसे हवा और पानी में खतरनाक स्तर तक प्रदूषण फैल चुका है। इससे कम खतरनाक श्रेणी ऑरेंज कैटेगरी है इनको भी उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की हरी झंडी नहीं मिल पायी है। ये भी बंद होंगे। स्थानीय प्रशासन सीवेज और ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त करेगा और पाइपलाइन के जरिये ही पानी की आपूर्ति सुनिश्चित कराएगा। पिछले दशकों में तमाम लोग जलजनित बीमारियों के शिकार हो चुके हैं।

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने इस सम्बन्ध में दायर याचिका पर यह आदेश दे दिया है। याचिका में कहा गया था कि नोएडा औद्योगिक क्षेत्र से लगे पांच गांवों सादोपुर, अछेजा, सादुल्लापुर, बिश्नुली और खेरा धरमपुरा में चर्म रोगों के अलावा हेपेटाइटिस सी और कैंसर के मरीज तेजी से बढ़े हैं। इन गांवों की आबादी 26 हजार से ज्यादा नहीं है लेकिन पिछले पांच साल के दौरान 200 से अधिक कैंसर पीड़ितों की मौत हो चुकी है। केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती भी इस मामले में जांच के आदेश दे चुकी हैं।

न्यायाधिकरण ने जहां लोगों की स्थिति पर अपनी चिंता का इजहार किया बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी लताड़ लगायी। न्यायाधिकरण ने कहा कि यह सिर्फ इन दोनो की ड्यूटी ही नहीं है बल्कि क्षेत्र के लोगों को अच्छा पर्यावरण देना इनका कर्तव्य भी है। इस क्षेत्र में करीब 137 औद्योगिक इकाइयां हैं जिनमें से अधिकांश प्रदूषण फैला रही हैं। इन फैक्ट्रियों में 30 इकाइयां रेड कैटगरी में, 29 आरेंज कैटगरी में तथा 78 ग्रीन कैटगरी में हैं। प्राधिकरण ने भूजल का इस्तेमाल कर रहीं इकाइयों को 31 दिसम्बर 2015 से पहले अनुमति लेने का भी निर्देश दिया।

 

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