मकर राशि के लोग जरूर पढ़ें ये खबर, खुल सकते हैं भाग्य के दरवाजे

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लखनऊ। आइये जानें मकर राशि वाले लोगों का मुख्य रत्न व उपरत्न क्या है , साथ ही विधि व धरण करने से लाभ तथा धारण करने का बीज मंत्र।

मकर(Capricornus):- मकर राशि का स्वामी ग्रह है शनि अतः मकर राशि वाले नीलम धारण करना चाहिए।

उपरत्न:- नीलम का उपरत्न जमुनिया, लाजवर्त, काला हकीक, काल स्टार होता है जोकि नीलम के अभाव में देता है लाभ।

नीलम की विशेषता तथा धारण करने से होने वाले लाभ:- नीलम शनि ग्रह का प्रतिनिधि रत्न है ,अतः नीलम धारण करने से शनि से सम्बंधित सभी दोष शांत हो जाते हैं। मकर तथा कुंभ राशि वालों को नीलम पहनना अति शुभकारी होता है। नीलम के विषय मे कहा जाता है को यह रत्न सबसे शिघ्रता से अपना प्रभाव दिखता है।नीलम का प्रभाव शुभ तथा अशुभ दोनों प्रकार से होता है, इसी कारण नीलम परीक्षण के बाद या किसी कुशल ज्योतिर्विद के निर्देशन में ही धारण करना चाहिए। नीलम के शुभ अथवा अशुभ परीक्षण के लिए रात में सोते समय अपने तकिये के नीचे रख कर सोना चाहिए , यदि आपको सुबह तक कुछ नुकसान न हो या शुभ स्वप्न आये या शुभ समाचार मिल तो नीलम पहनना शुभ है और यदि बुरे स्वप्न या खराब समाचार मिले तो अशुभ है।

नीलम धारण करने से जमीन-जायदात जैसी परेशानियों से मिलती है मुक्ति

किंतु नीलम कुम्भ राशि व मकर राशि वाले जातकों को कभी भी नुकसान नही पहुचता है।नीलम शनि की साढ़े साती का दुष्प्रभव दूर करता है। यह यदि अनुकूल पड़े तो धारण कर्ता को धन-धान्य, सुख-संपत्ति, मां-सम्मना, आयु, बुद्धि, बल तथा वंश की वृद्धि करके मुख मण्डल को आभामण्डल से चमक देता है। नीलम खोई सम्पत्ति को वापस दिलवाता है। इसे धरन करने से मन पवित्र रहता है,तथा दुष्कर्मों से मुक्ति दिला कर सत्कर्मों में लगता है।ट्रांसपोर्ट, ठेकेदारी, जमीन-जायदात , खदान, कारखाने , व्यापारी, पुलिस ऑफिसर, आदि को यह विशेष तरक्की दिलवाता है।जिनके बाल झड़ रहें हो या बालों में खुजली हो वह नीलम धारण करने से इन सब परेशानियों से मुक्ति पा जाते हैं। नीलम के बारे में यह कहा जाता है कि यह अगर आपको लाभ करे तो भिखारी को रातोरात राजा बनाने की क्षमता रखता है।नीलम दिन दूना रात चौगुना तरक्की करता है इसमें संदेह नही है।

नीलम धारण करने की विधि:- नीलम कम से कम सवा तीन रत्ती का या इससे ऊपर का पहनना चाहिए। नीलम 5, 7,9,रत्ती का शुभ होता है। नीलम को सोने या चाँदी में जड़वाना चाहिए। नीलम की अंगूठी को शुक्रवार की रात में ताँबे के बर्तन में पंचामृत में रख देना चाहिए।शनि वार की सुबह गंगाजल से पवित्रता के साथ स्नान कराकर प्रातः सूर्योदय से 11 बजे या किसी विद्वान के निर्देशन में भगवान शिव के शिव लिंग या पीपल वृक्ष की जड़ में स्पर्श कराकर दाहिने हाथ की मध्यमा अंगुली में पूर्व या ईशान कोंण की ओर मुख करके धारण करना चाहिए।

धारण करने का मंत्र :-
किसी ज्योतिर्विद के निर्देशन में कम से कम 108 बार ॐ शं शनैश्चराय नमः मन्त्र से अभिषिक्त कर धारण करना चाहिए।

विशेष:- नीलम जिस दिन धारण किया जाए उस दिन से यह पाँच वर्ष तक अपना अधिक प्रभाव दिखता है।

।।आचार्य स्वामी विवेकानन्द।।
।।श्री अयोध्या धाम।।
ज्योतिर्विद
संपर्क सूत्र:-9044741252

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