सावधान! गर प्लेटलेट्स के साथ दखें ये लक्षण, तो आपकी जान…

0

नई दिल्ली। बारिश के बाद भरे हुए पानी में मच्छर पनपते हैं। इसके काटने से डेंगू और चिकुनगुनिया जैसी बीमारी काफी तेजी से फैलती है। डेंगू होने की वजह से शरीर में प्लेटलेट्स कम होते जाते है। ऐसे में आपको बता दें कि सिर्फ प्लेटलेट्स के बढ़ जाने से ही डेंगू का ठीक नहीं होता है। इसके लिए आपको बेहद जरूरी तीन काम करने होंगे, अगर इग्नोर कर दिए तो जान तक जा सकती है।
Image result for dengueडेंगू में सबसे बड़ी समस्या कैपिलरी-लीक की होती है, डेंगू होने पर इनमें छेद हो जाते हैं। इन्हीं छेदों से खून रिसकर शरीर में जमा होने लगता है। इसके कारण ब्लड प्रेशर गिरने लगता है और हिमैटोक्रिट बढ़ने लगता है। डेंगू के मरीज को तीन जांच जरूर करानी चाहिएं- ब्लडप्रेशर, हिमैटोक्रिट और प्लेटलेट्स काउंट।

सिर्फ प्लेटलेट्स पर ध्यान देना काफी नहीं, डेंगू की शुरुआत होने पर बुखार और बदन दर्द की कोई दवा खुद से न लें। डेंगू होने पर जितना जल्दी हो डॉक्टर से मिलें। जब प्लेटलेट्स की संख्या गिरकर बीस हजार के नीचे हो जाती है, तभी डॉक्टर प्लेटलेट्स चढ़ाने की सलाह देते हैं।

आपको बता दें कि लेवल ज्यादा नीचे चले जाने पर प्लेटलेट्स चढ़ाना बेकार है और उसका कोई फायदा नहीं है। इसलिए इलाज कर रहे डॉक्टर की सलाह पर चलना चाहिए। डेंगू के इलाज का अर्थ केवल और केवल प्लेटलेट्स बढ़ाकर जान बचाना नहीं है, जान तभी बचेगी जब मरीज का कैपिलरी-लीक ठीक होगा।

बता दें कि डेंगू की शुरुआत तेज बुखार से होती है, जिसके साथ पूरे शरीर, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द होता है। जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द की वजह से मरीज़ का चलना फिरना मुश्किल हो जाता है। जिसकी वजह से इसे ‘हड्डी तोड़ बुखार’ भी कहा जाता है। बुखार में आंखें लाल हो जाती हैं और आंखों से लगातार पानी बहता है। इन सबके साथ मरीज को उल्टी आना, जी घबराना, भूख नहीं लगना तथा नींद नहीं आना जैसे लक्षण भी झेलने पड़ते हैं।

 

loading...
शेयर करें