बिहार की राजनीति में बदले जातीय समीकरण, हर चार विधायकों में एक सवर्ण

तेजस्वी यादव की पार्टी से 7 सीटों पर राजपूत ने जीत दर्ज की है। राजद ने 8 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे जिनमें से सात लोगों ने जीत दर्ज की। कांग्रेस के 10 राजपूत प्रत्याशियों में से केवल एक प्रत्याशी ही जीत हांसिल कर सका।

पटना: बिहार विधानसभा में इस बार एनडीए पूर्ण बहुमत के साथ जीत दर्ज करके पहुंच चुकी है। एनडीए गठबंधन का फार्मूला नीतीश कुमार को भले ही पसन्द न आया हो, लेकिन बिहार के सवर्ण समुदाय के लिए यह काफी फायदेमंद रहा। इस बार बिहार विधानसभा में सवर्ण विधायकों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। एनडीए के सत्ता में आने के बाद ही जहां पर सवर्ण विधायकों में वृद्धि हुई है तो अन्य जाति के विधायकों में घटोतरी हुई है। पिछड़ी जाति के लिए यह समीकरण नुकसान देह साबित हुआ।

राजपूत विधायकों में हुई वृद्धि

अगर राजपूत विधायकों को देखे तो पिछले चुनाव में इनकी संख्या 20 थी जो कि इस विधानसभा चुनाव में बढ़कर 28 हो गई है। बीजेपी पार्टी से 15 विधायक चुनाव जीत के विधानसभा पहुंचे तो जेडीयू के 7 प्रत्याशियों में से 2 प्रत्याशी ही विधानसभा में अपनी जगह सुनिश्चित कर पाए।

वहीं तेजस्वी यादव की पार्टी से 7 सीटों पर राजपूत ने जीत दर्ज की है। राजद ने 8 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे जिनमें से सात लोगों ने जीत दर्ज की। कांग्रेस के 10 राजपूत प्रत्याशियों में से केवल एक प्रत्याशी ही जीत हांसिल कर सका। इस बार बीजेपी और राजद पार्टी के राजपूत विधायकों में इजाफा हुआ तो कांग्रेस और जेडीयू के विधायकों में कमी आई है।

ब्राह्मण विधायकों ने भी बनाई बढ़त

ब्राह्मण विधायकों ने भी इस बार अपनी बढ़त बनाई है। इस चुनाव में 12 विधायक विधानसभा पहुंचे जबकि 2015 के विधानसभा में इनकी संख्या 11 थी। बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार बीजेपी से पांच, जेडीयू से दो आरजेडी से दो तो कांग्रेस से तीन ब्राह्मण इस बार विधायक चुने गए।

यादव जाति के विधायकों में आई कमी

2020 विधानसभा चुनाव में यादव संख्या में खासी कमी आई है। जहां 2015 के चुनाव में 61 विधायक चुने गए थे इस बार यह संख्या घटकर 52 पर चली गई।
इस बार आरजेडी की सीट पर कुल 36 विधायक विधानसभा पहुंचे तो कांग्रेस से एक यादव विधायक बना। जेडीयू की पार्टी से पांच और बीजेपी से छ: विधायक और अन्य पार्टी से विधानसभा पहुंचे।

बिहार में मुस्लिम विधायकों का आंकड़ा दस साल पीछे गया

इस बार के विधानसभा चुनाव में 19 मुस्लिम विधायकों ने जीत हांसिल की जबकि 2015 में 24 विधायकों ने विधानसभा सीटों पर कब्जा किया था। इस बार का आंकड़ा 10 साल पीछे चला गया है। मुस्लिम विधायकों ने इस बार आरजेडी की सीट से सबसे ज्यादा जीत हासिल की।

इस बार के बिहार विधानसभा चुनाव में कुर्मी-कुशवाहा जाति के विधायकों में भी कमी आई है तो बिहार विधानसभा में दलित-वैश्य एसटी के विधायकों में भी कमी आई है।

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