2005 के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची सीबीआई

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नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय के वर्ष 2005 के उस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, जिसमें बोफोर्स 155 एमएम होवित्जर तोप की खरीद से संबंधित भ्रष्टाचार मामले में ब्रिटेन स्थित हिंदुजा बंधुओं श्रीचंद, गोपीचंद और प्रकाश हिंदुजा को बरी कर दिया गया था।

सीबीआई ने हालांकि नए तथ्योंकी ओर इशारा किया है

सीबीआई ने वर्ष 2005 में हाईकोर्ट के निर्णय के विरुद्ध अपनी याचिका में कुछ नए तथ्यों के बारे में बताया है, जिसकी जांच कराए जाने का आधार बनाकर बोफोर्स मामले को दोबारा खोलने की मांग की गई है। सीबीआई ने हालांकि ‘नए तथ्यों’ की ओर इशारा किया है, लेकिन 12 वर्ष लंबे अंतराल के बाद याचिका पर सुनवाई का निर्णय लेना सुप्रीम कोर्ट के लिए आसान नहीं होगा।

याचिका दाखिल करने का औचित्य सिद्ध करना मुश्किल होगा

महान्यायवादी के.के. वेणुगोपाल ने सरकार को बताया कि उनके विचार में वर्ष 2005 में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय के विरुद्ध इतने लंबे समय बाद याचिका दाखिल करने का औचित्य सिद्ध करना मुश्किल होगा। कार्मिक सचिव को लिखे एक पत्र में वेणुगोपाल ने कहा है, इस निर्णय के 12 वर्ष से ज्यादा समय गुजर गए हैं। इस समय सुप्रीम कोर्ट के समक्ष इस संबंध में याचिका, मेरे विचार में देरी के आधार पर संभवत: खारिज कर दी जाएगी।

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