हाथरस गैंगरेप कांड की जांच शुरू, सीबीआई ने केस को अपने हाथ में लिया

 

 सीबीआई  की जांच शुरू
सीबीआई की जांच शुरू

हाथरस: हाथरस गैंगरेप कांड को लेकर अब सीबीआई का एक्शन शुरू हो गया है. सोमवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस मामले की सुनवाई हुई, जिसमें पीड़ित परिवार ने अपना दर्द अदालत के सामने रखा. दूसरी ओर सीबीआई की जांच टीम पीड़िता के गांव पहुंच चुकी है. इस टीम में फॉरेंसिक एक्सपर्ट भी हैं. टीम घटनास्थल पर पहुंच गयी है और सबूत इकट्ठा करने में जुटी है.

अपडेट्स:

11.40 AM: सीबीआई की टीम बुलगढ़ी गांव में मौका ए वारदात पर पहुंच गयी है. यहां क्राइम सीन के आसपास सीबीआई ने घेराबंदी कर दी है. सीबीआई के साथ फॉरेंसिक टीम के अफसर भी मौजूद हैं.

10.46 AM: हाथरस गैंगरेप पीड़िता के परिवार के वकील सीमा कुशवाहा ने हाईकोर्ट से अपील की है कि एसआईटी की रिपोर्ट को मीडिया में ना दिया जाए. अभी ये अपील मौखिक तौर पर की गई है, जल्द ही इसको लेकर याचिका भी दी जाएगी. जिसमें केस की प्राइवेसी, ट्रांसफर की बात कही जाएगी.

10.05 AM: हाथरस में पुलिस की टीम मौका ए वारदात पर पहुंच गई है. अब से कुछ देर में सीबीआई की टीम भी क्राइम सीन पर पहुंच चुकी है.

09.30 AM: हाथरस कांड की जांच पूरी होने तक सीबीआई यहां पर अपना एक अस्थाई कार्यालय भी बनाया है. सीबीआई जल्द ही पीड़िता के परिवार से मुलाकात भी करेगी.

09.25 AM: सीबीआई की टीम कभी भी क्राइम सीन पर पहुंची है. गांव के अंदर भारी सुरक्षा तैनात कर दी गई है. बीते दिन ही सीबीआई ने पूरा केस अपने हाथ में ले लिया है, जहां केस से जुड़े सभी कागजात और केस डायरी को खंगाला गया.

हाथरस गैंगरेप कांड की जांच सीबीआई ने अपने हाथ में ले ली है. स्थानीय पुलिस स्टेशन से केस से जुड़े सभी कागजात इकट्ठे किए जा चुके हैं. बता दें कि अभी इस मामले में प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी की पूछताछ भी चल रही है, जिसे दस दिन का एक्सटेंशन मिला था.

हाई कोर्ट की सुनवाई:

बीते दिन सोमवार को हाई कोर्ट में हाथरस कांड की सुनवाई हुई. इस दौरान पीड़ित परिवार ने अपना बयान अदालत के सामने रखा, जिसमें आरोप लगाया कि स्थानीय प्रशासन ने बिना उनकी सहमति से जल्दबाजी में पीड़िता का अंतिम संस्कार कर दिया. पीड़िता के परिवार के वकील सीमा कुशवाहा के मुताबिक, अदालत ने इस दौरान सरकार के प्रतिनिधियों से सख्त सवाल पूछे जिसका उनके पास कोई जवाब नहीं था.

हाई कोर्ट की ओर से जल्दबाजी में अंतिम संस्कार करने, अंतिम संस्कार करने के तरीके और परिवार से अनुमति ना लेने पर फटकार भी लगाई गई. परिवार की ओर से जो आरोप लगाए गए हैं, उनपर अब दो नवंबर से बहस शुरू होगी. दूसरी ओर 15 अक्टूबर को इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई होनी है, जहां यूपी सरकार की ओर से परिवार की सुरक्षा के बारे में जानकारी दी जाएगी.

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