नव वर्ष पर मनेगा जश्न, ऐतिहासिक हिरण्यवती में भी बहेगा पानी

डीएम भूपेन्द्र एस चौधरी ने बताया कि जिले में पिछले एक सप्ताह से कोरोना के एक-दो केस ही आ रहे हैं। एक्टिव केस की संख्या भी 20 से कम ही है। इसको देखते हुए कुशीनगर में नववर्ष पर लगने वाले मेले की अनुमति दी गई है।

कुशीनगर: वैश्विक महामारी कोरोना के चलते पर्यटन सीजन में भी शांत पड़ी भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर में नव वर्ष का मेला कुछ बंदिशों के बीच आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। जिलाधिकारी भूपेन्द्र एस चौधरी ने इसके लिए ज्वाइंट मजिस्ट्रेट कसया को तैयारी करने के लिए कहा है। साथ ही कुशीनगर की ऐतिहासिक हिरण्यवती नदी में पानी प्रवाह बनाए रखने के लिए नहर के जरिए पानी भरने का भी निर्देश दिया है।

जिलाधिकारी ने आयोजन के लिए दी अनुमति

कुशीनगर में हर साल नव वर्ष पर इधर-उधर घूमने वालों की भारी भीड़ उमड़ती है। स्थानीय पर्यटकों के अलावा कई विदेशी पर्यटक भी आते हैं। कोरोना संकट के चलते मार्च से ही विदेशी पर्यटकों का आना बंद है। लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी स्थानीय पर्यटक भी कम संख्या में ही कुशीनगर पहुंच रहे हैं। कोरोना संकट के चलते लोग नव वर्ष का मेला आयोजित नहीं होने की उम्मीद लग रही थी। लेकिन जिले में कोरोना के मरीजों की संख्या में घटोतरी को देखते हुए डीएम ने एक जनवरी को होने वाले आयोजन के लिए अनुमति दे दी है।

मरीजों की घटोतरी को देखते हुए दी अनुमति

डीएम भूपेन्द्र एस चौधरी ने बताया कि जिले में पिछले एक सप्ताह से कोरोना के एक-दो केस ही आ रहे हैं। एक्टिव केस की संख्या भी 20 से कम ही है। इसको देखते हुए कुशीनगर में नववर्ष पर लगने वाले मेले की अनुमति दी गई है। हालांकि इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने के लिए अलग से इंतजाम किए जा रहे हैं। इसके तहत जगह-जगह बैरिकेटिंग करके भीड़ को रोकने का इंतजाम किया जाएगा।

इसके अलावा लोगों व दुकानदारों को जागरूक किया जाएगा कि भीड़ लगाने की बजाय दूर-दूर रहकर नव वर्ष का उत्सव मनाएं। कुशीनगर में मंदिर मार्ग को नियमित तौर पर दो घंटे के लिए वाकिंग जोन घोषित किया गया है। इसके तहत मंदिर मार्ग पर शाम चार बजे से छह बजे तक वाहनों के संचालन की अनुमति नहीं है। लोग केवल पैदल ही मुख्य गेट से लेकर माथा कुंवर मंदिर तक आ जा सकते हैं।

जिलाधिकारी ने कहा कि बौद्धकालीन नदी हिरण्यवती की वजूद खतरे में है। इसकी सफाई कर पानी का प्रवाह बनाए रखने के लिए झुंगवा माइनर से नहर का पानी नदी तक लाने का प्रयास किया जा रहा है। पहले इसके लिए हाइवे के किनारे बने नाले का प्रयोग करने का प्रस्ताव था। लेकिन नाले का तल नहर से ऊंचा होने के चलते इसमें दिक्कत आ रही है। इसको देखते हुए अब प्लास्टिक के पाइप से नहर का पानी पंपिंग सेट के जरिए नदी तक लाने पर विचार हो रहा है। इसके लिए ज्वाइंट मजिस्ट्रेट को सिंचाई विभाग के अफसरों से बात कर कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया है।

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