केंद्र से देश में जिला स्तर पर सर्जिकल सेंटर खोलने की गुजारिश

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नई दिल्ली| चिकित्सा विशेषज्ञों ने देश में जिला स्तर पर सरकारी सहयोग की मदद से बड़े शल्य चिकित्सा केंद्र खोलने की जरूरत पर बल देते हुए कहा है कि ऐसे चिकित्सा केंद्रों में सभी तरह की चिकित्सा तकनीक होनी चाहिए और इन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाना चाहिए। एसोसिएटेड चेम्बर्स आफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री आफ इंडिया (एसोचैम) की ओर से यहां आयोजित ‘सभी के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा : स्वास्थ्य सेवा में बदलाव’ विषय पर सम्मेलन को नई दिल्ली स्थित कालरा अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. आर. एन. कालरा ने भी संबोधित किया।


कालरा ने देश में बड़े शल्य चिकित्सा केंद्रों की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि बहुसंख्यक आबादी निजी अस्पतालों एवं क्लिनिकों में इलाज करा पाने में आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हो पाती है और उसे रियायती दर पर या नि:शुल्क चिकित्सा सुविधाओं की जरूरत होती है। इस जरूरत को पूरा करने के लिऐ जिला स्तर पर बड़े शल्य चिकित्सा केंद्र खोले जाने चाहिए जहां हर तरह की चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो।

इस सम्मेलन का उद्घाटन इस सप्ताह बुधवार को वीएमएमसी एवं सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेन्द्र शर्मा ने किया। सम्मेलन में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा से जुड़े प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

डॉ कालरा ने कहा कि शहरों के साथ-साथ गांवों में बड़े अस्पतालों को बढ़ावा देना चाहिए, जिनमें शल्य चिकित्सकों की तैनाती भी हो। इसके अलावा निजी स्वास्थ्य क्षेत्र में समूह प्रैक्टिस को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए ताकि चिकित्सा खर्च को घटाया जा सके। इसके अलावा गांवों में निजी प्रैक्टिस को बढ़ावा देने के लिए तथा निजी अस्पताल खोलने के लिए सस्ते ब्याज दर पर लोन की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए। इसके साथ निवेश में प्रत्यक्ष रियायत देनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज के समय में नई सर्जिकल विधियां व प्रौद्योगिकियां तेजी से उपलब्ध हो रही हैं। लेकिन, नई विधियों एवं तकनीकों के कारण कई निजी अस्पतालों को चिकित्सा शुल्क बढ़ाना पड़ता है। तेजी से विकसित होने वाली नई तकनीकों तथा भारत में मध्यम वर्ग की आकांक्षाओं के मद्देनजर अस्पतालों पर नई चिकित्सा तकनीकों पर अधिक खर्च करने के लिए दवाब पड़ता है। इससे स्वास्थ्य खर्च भी बढ़ता है। मरीजों की अधिक उम्मीदों के कारण भी अस्पताल महंगी तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित होते हैं।

उन्होंने स्वास्थ्य एवं चिकित्सा के क्षेत्र से जुड़े सभी भागीदारों को, चाहे वे निजी क्षेत्र में हों या सार्वजनिक क्षेत्र में, एक साथ आकर ऐसे प्रभावी एवं सफल मॉडल विकसित करने का आह्वान किया, जिसकी मदद से सभी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का सपना पूरा हो सके।

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