फ्री वैक्सीन पर केंद्र ने जारी की Guideline, राज्यों को आबादी-मरीजों के हिसाब से मिलेगा टीका

नई दिल्ली: सोमवार को प्रधानमंत्री ने देश को संबोधित कर राज्यों के कन्धों पर पड़े वैक्सीन के बोझ को अपने कंधे पर लेने का ऐलान किया. जिसके ठीक अगले दिन यानि आज मंगलवार को केंद्र सरकार ने इससे जुड़ी Guideline भी जारी कर दी है. दूसरी लहर के कमजोर होने के बीच वैक्सीनेशन के लिए संशोधित नई Guideline (Vaccination Policy of India) में कहा गया है कि केंद्र की ओर से प्रदेशों को आबादी, संक्रमण का बोझ और वैक्सीनेशन की गति के आधार पर टीकों की खुराकों का आवंटन किया जाएगा.

केन्द्र सरकार की ओर से जारी नई Guidelines में कहा गया है कि अगर Vaccines का वेस्टेज ज्यादा होगा तो इसका असर प्रदेशों को होने वाले आवंटन पर पड़ सकता है. PM नरेंद्र मोदी की घोषणा के एक दिन बाद संशोधित Guidelines जारी की गई हैं. सोमवार को प्रधानमंत्री ने ऐलान किया था कि केंद्र सरकार 21 जून से सभी राज्यों में सभी 18+ नागरिकों को कोरोना रोधी वैक्सीन मुफ्त उपलब्ध कराएगी.

राज्य राष्ट्रीय औसत (6.3%) की तुलना में कर रहे बहुत अधिक वेस्टेज

बता दें कोरोना रोधी टीके के वेस्टेज को लेकर केंद्र और कुछ प्रदेशों के बीच अनबन चल रही है. मई में स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार – झारखंड (लगभग 37%), छत्तीसगढ़ (30%), तमिलनाडु (15.5%), जम्मू और कश्मीर (10.8%) और मध्य प्रदेश (10.7%) ने वेस्टेज का जिक्र किया था. रिपोर्ट में कहा गया था कि ये राज्य राष्ट्रीय औसत (6.3%) की तुलना में बहुत अधिक वेस्टेज कर रहे हैं. 18 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों के जनसंख्या समूह के भीतर, राज्य/केंद्र शासित प्रदेश टीके की आपूर्ति अनुसूची में अपनी प्राथमिकता तय कर सकते हैं. कई राज्य आयु समूहों के भीतर प्राइआरिटी तय करने का विकल्प दिए जाने की मांग कर रहे थे.

प्राइवेट अस्पतालों में प्रति खुराक ज्यादा से ज्यादा 150 रुपये

वहीं प्राइवेट अस्पतालों के लिए covid vaccine की डोज़ की कीमत प्रत्येक टीका निर्माता द्वारा घोषित की जाएगी और बाद में होने वाले किसी भी बदलाव को पहले ही जानकारी दी जाएगी. प्राइवेट अस्पताल सर्विस फीस के रूप में प्रति खुराक ज्यादा से ज्यादा 150 रुपये तक नागरिकों से चार्ज कर सकते हैं. प्रदेश सरकारें इसकी मोनिटरिंग कर सकती हैं. कोरोना रोधी वैक्सीन निर्माताओं द्वारा उत्पादन और नए टीकों को प्रोत्साहित करने के लिए, घरेलू वैक्सीन निर्माताओं को सीधे प्राइवेट अस्पतालों को भी वैक्सीन उपलब्ध कराने का विकल्प दिया गया है.

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