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कारोबार और कारोबारियों के लिए आये ‘अच्छे दिन’

नई दिल्ली। आने वाले दिनों में देश में बिज़नेस के लिहाज से अच्छे दिन आ सकते हैं। सरकार ने बिज़नेस करने के माहौल को बेहतर बनाने के उद्देश्य से संसद में दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता 2015 पेश कर दिया है। दावा है कि इसमें दिवाला संबंधी मामलों का समयबद्ध तरीके से समाधान निकालने का प्रावधान किया गया है।

जानकारों के मुताबिक विधेयक का उद्देश्य इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देना है ताकि उच्च आर्थिक वृद्धि दर हासिल की जा सके। विधेयक में भारतीय दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड स्थापित करने का प्रावधान किया गया है ताकि पेशेवरों, एजेंसियों और सूचना सेवाओं के क्षेत्र में कंपनियों, गठजोड़ फर्म और व्यक्तियों के दिवालिया होने के विषयों का नियमन किया जा सके। प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, कॉरपोरेट क्षेत्र में दिवाला मामलों का समाधान 180 दिनों में होगा जिसे 90 दिन और बढ़ाया जा सकता है।

कॉर्पोरेट दिवाला के मामलों का त्वरित निपटारा 90 दिनों में करने का भी प्रावधान किया गया है। लोकसभा में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसे पेश करते हुए कहा कि इस संहिता में एक कोष स्थापित करने का प्रस्ताव किया गया है जिसे भारतीय दिवाला एवं शोधन अक्षमता कोष कहा जाएगा। मौजूदा समय में इस विषय पर विभिन्न मामलों के निपटारे के लिए कई कानून हैं जिनमें रूग्ण औद्योगिक कंपनी विशेष उपबंध अधिनियम 1993, वित्तीय आस्तियों का प्रतिभूतिकरण और पुनर्गठन तथा प्रतिभूति हित का प्रवर्तन अधिनियम 2002, बैंकों एवं वित्तीय संस्थाओं को शोध्य ऋण वसूली अधिनियम 1993, कंपनी अधिनियम 2013 आदि शामिल हैं।

इसलिए पड़ी जरूरत 

अभी दिवाला और ऋण शोधन अक्षमता मामलों के निपटारे के लिए कोई एक कानून नहीं है बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों के लिए विभिन्न नियम हैं। इस बारे में वर्तमान ढांचा अपर्याप्त, अप्रभावी है और समाधान में बिना कारण देरी होती है।

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