Chaitra Navratri का पावन दिन शुरू, इन शुभ मुहुर्त में करें कलश स्थापना, आज होगी मां शैलपुत्री की पूजा

लखनऊ: चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) की शुरुआत आज मंगलवार 13 अप्रैल से शुरू हो रही है। यह पावन पर्व नौ दिन मनाया जाएगा। इसकी समाप्ति 21 अप्रैल बुधवार को नवमी तिथि के साथ होगी। भारतवर्ष में आज मंगलवार से लेकर अगले नौ दिन तक पूरे विधि विधान के साथ मां दुर्गा की पूजा-आराधना की जाएगी। इसके बाद फिर रामनवमी का त्योहार मनाया जाएगा। संवत 2078 का आरंभ आज 13 अप्रैल से होगा। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) भी आरंभ हो गई है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को नवरात्रि प्रारंभ होंगे। देशभर में मंगलवार से लेकर नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग नौ रूपों की देवियों की पूजन की जाती है।

नवरात्रि के प्रथम दिन घटस्थापना का अधिक महत्व होता है, इस दौरान शुभ मुहूर्त के अनुसार ही भक्तो को पूरे विधि-विधान के साथ घटस्थापना करते हुए, मां शैलपुत्री की पूजा-आराधना करनी चाहिए। आज 13 अप्रैल मंगलवार को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को कलश स्थापना शुभ मुहूर्त प्रातः05:28से 10:14 तक है। इसकी अवधि : 4 घंटे 15 मिनट है। कलश स्थापन का दूसरा मुहूर्त सुबह 11:56 से 12:50 तक इसके उपरांत भी कलश स्थापन हो सकता है।

जानें Chaitra Navratri की तिथियां:

13 अप्रैल- नवरात्रि प्रतिपदा- मां शैलपुत्री पूजा और घटस्थापना

14 अप्रैल- नवरात्रि द्वितीया- मां ब्रह्मचारिणी पूजा

15 अप्रैल- नवरात्रि तृतीया- मां चंद्रघंटा पूजा

16 अप्रैल- नवरात्रि चतुर्थी- मांकुष्मांडा पूजा

17 अप्रैल- नवरात्रि पंचमी- मां स्कंदमाता पूजा

18 अप्रैल- नवरात्रि षष्ठी- मां कात्यायनी पूजा

19 अप्रैल- नवरात्रि सप्तमी- मां कालरात्रि पूजा

20 अप्रैल- नवरात्रि अष्टमी- मां महागौरी

21 अप्रैल- नवरात्रि नवमी- मां सिद्धिदात्री , रामनवमी

22 अप्रैल- नवरात्रि दशमी- नवरात्रि पारण

ये भी पढ़ें : आखिर क्यों अब इन लोगों को एयरलाइन नहीं serve करेंगी खाना, पढ़ें पूरी खबर

देवी दुर्गा के देखें नौ अलग-अलग रूप

नवरात्रि के हर दिन देवी दुर्गा के अलग-अलग रूप की पूजा होती है। देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग रूप हैं- शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्रि। नवरात्र के पहले दिन माता दुर्गा के शैलपुत्री रूप की आराधना की जाती है। मंगलवार 13 अप्रैल को माता शैलपुत्री का पूजा करना चाहिए। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण, मां के इस रूप का नाम शैलपुत्री पड़ा। उनका वाहन बैल होने के कारण, मांशैलपुत्री को देवी वृषारूढ़ा नाम से भी जाना जाता है। मां शैलपुत्री के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का फूल सुशोभित है। जानिए मां शैलपुत्री की पूजा विधि और मंत्र।

मंत्र –

‘ऊं ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नम: ऐसा करने से उपासक को धन-धान्य, ऐश्वर्य, सौभाग्य, आरोग्य, मोक्ष तथा हर प्रकार के सुख-साधनों की प्राप्ति होती है।

वन्दे वाञ्छित लाभाय चन्द्र अर्धकृत शेखराम्।
वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

ये भी पढ़ें : चैत्र नवरात्रि के पहले दिन Acharya Swami Vivekananda ने इन राशियों के लिए बताया कुछ खास

 

Related Articles