Chaitra Navratri का आज चौथा दिन, विधि विधान से करें मां कूष्मांडा की पूजा, इस मंत्र का करें जाप

लखनऊ: चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) का आज शुक्रवार को चौथा दिन है। आज मां दुर्गा के चौथे स्वरूप की पूजा की जाती है। चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) के चौथे दिन आज मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवी कूष्मांडा ने ही इस सृष्टि की रचना की थी। इसलिए इन्हें सृष्टि की आदिस्वरूपा और आदिशक्ति भी कहते है।

मान्यता है कि शुरुआत में चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा था, तब देवी ने ब्रह्मांड की रचना अपनी मंद हंसी से की थी। अष्टभुजा देवी अपने हाथों में धनुष, बाण, कमल-पुष्प, कमंडल, जप माला, चक्र, गदा और अमृत से भरपूर कलश रखती हैं।

आज के दिन निम्लिखित नियम अनुसार विधि विधान से पूजन करें

सबसे पहले स्नान कर ले।

इसके बाद मंदिर में मां कूष्मांडा का ध्यान कर उनको धूप, गंध, अक्षत्, लाल पुष्प, सफेद कुम्हड़ा, फल, सूखे मेवे और सौभाग्य का सामान अर्पित करें।

फिर मां कूष्मांडा को हलवे और दही का भोग लगाएं। इसके बाद आप खुद इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण कर सकते हैं।

मां का अधिक से अधिक ध्यान करें।

पूजा के अंत में मां की आरती करें।

देवी कूष्मांडा के मंत्र:

या देवी सर्वभू‍तेषु मां कूष्‍मांडा रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

ध्यान मंत्र:

वन्दे वांछित कामर्थेचन्द्रार्घकृतशेखराम्।

सिंहरूढाअष्टभुजा कुष्माण्डायशस्वनीम्॥

सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।

दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥

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देवी कूष्मांडा की आरती:

कूष्मांडा जय जग सुखदानी।

मुझ पर दया करो महारानी॥

पिगंला ज्वालामुखी निराली।

शाकंबरी मां भोली भाली॥

लाखों नाम निराले तेरे ।

भक्त कई मतवाले तेरे॥

भीमा पर्वत पर है डेरा।

स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥

सबकी सुनती हो जगदम्बे।

 

 

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